शिमला जिला के प्रसिद्ध मंदिरों के कायाकल्प की तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन अब मंदिरों में न केवल पारदर्शिता लाने जा रहा है, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हाई-टेक कदम भी उठा रहा है। जानिए कैसे बदल जाएगी आपकी अगली मंदिर यात्रा।
शिमला जिला प्रशासन अब मंदिरों की व्यवस्था को डिजिटल और अधिक सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। उपायुक्त शिमला, अनुपम कश्यप ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला के सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि मंदिरों में आयोजित होने वाले भंडारों के लिए न्यूनतम मानक (Standard Menu) तय किए जाएं। इसका मुख्य उद्देश्य भंडारे के व्यंजनों में एकरूपता लाना और गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। इन मानकों के निर्धारण के बाद ही भंडारे की दरें (Rates) तय की जाएंगी, जिससे श्रद्धालुओं को स्पष्टता और सुविधा मिलेगी।
प्रशासन जिला के प्रमुख मंदिरों के लिए एक अत्याधुनिक वेबसाइट विकसित कर रहा है, जिसका लगभग 80% कार्य पूरा हो चुका है। इस वेबसाइट के माध्यम से श्रद्धालुओं को घर बैठे ही कई सुविधाएं मिलेंगी:
डिजिटल सेवाएँ: श्रद्धालु ऑनलाइन माध्यम से ‘वास्तविक दर्शन’, लाइव आरती, और चंदा देने की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
बुकिंग की सुविधा: सराय (ठहरने के स्थान) और भंडारा स्लॉट की बुकिंग अब एक क्लिक पर उपलब्ध होगी।
पारदर्शिता: वेबसाइट पर यह पूरी जानकारी उपलब्ध होगी कि किस दिन किसने भंडारा बुक किया है, जो पहले आम जनता के लिए सुलभ नहीं थी।
ऐतिहासिक जानकारी: मंदिरों का इतिहास, संस्कृति, लोकेशन मैप और आरती की समय-सारणी भी यहाँ विस्तार से दी जाएगी।
प्रथम चरण में शिमला के तीन प्रतिष्ठित मंदिरों—माता तारा देवी, संकटमोचन और जाखू मंदिर—को इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। दूसरे चरण में जिला के अन्य मंदिरों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम द्वारा तैयार की जा रही इस वेबसाइट का उद्देश्य न केवल प्रशासन में पारदर्शिता लाना है, बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के अनुभव को और अधिक सुगम और यादगार बनाना है।
By Vijay
