सच हिमाचल ब्यूरो: हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में विकास की गति को लेकर एक चिंताजनक स्थिति सामने आई है। भारत सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत प्रदेश की पंचायतों को विकास कार्यों के लिए लगभग ₹2100 करोड़ की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई थी।
हालांकि, जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन की सुस्ती के कारण इसमें से करीब ₹4 करोड़ की धनराशि अब भी पंचायतों के पास बिना खर्च किए लंबित पड़ी है। इस बड़ी राशि का समय पर उपयोग न हो पाना ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और जनसुविधाओं के विस्तार में बाधा बन रहा है।
इस वित्तीय गड़बड़ी और उपयोग न हुई राशि के निपटारे के लिए अब प्रदेश के पंचायती राज विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने इस संबंध में केंद्र सरकार को एक औपचारिक पत्र लिखकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया है और आगामी दिशा-निर्देशों की मांग की है। यह मामला न केवल प्रशासनिक देरी को दर्शाता है, बल्कि भविष्य में मिलने वाले केंद्रीय अनुदानों पर भी असर डाल सकता है। विभाग अब पंचायतों को इस लंबित बजट को जल्द से जल्द विकास योजनाओं में खपाने और उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) जमा करने के निर्देश दे रहा है ताकि राज्य के विकास कार्यों में कोई रुकावट न आए।
Content Writer- Vijay
