हिमाचल डेस्क: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में 06 जून, 2026 को शिमला में मंत्रिमंडल की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के विकास, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, किसानों और कर्मचारियों के कल्याण के लिए कई दूरगामी निर्णय लिए गए।
रोजगार और विभिन्न विभागों में नए पदों का सृजन: युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में सरकार ने इस बैठक में बड़े कदम उठाए हैं। मंत्रिमंडल ने भर्ती निदेशालय के तहत वर्क इंस्पेक्टर के 400 पदों को सृजित कर भरने की मंजूरी दी है। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में सहायक प्रोफेसरों के 17 पद और राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में अलग-अलग विभागों के लिए सहायक प्रोफेसरों के 75 पदों को सृजित कर भरने का फैसला लिया गया है। वहीं मंडी जिले के नेरचौक स्थित श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के कार्डियोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर और वरिष्ठ रेजिडेंट के दो-दो पद भरे जाएंगे। इसके अतिरिक्त, हमीरपुर जिले के नेरी स्थित बागवानी एवं वानिकी महाविद्यालय में तीन पद, मण्डलायुक्त कार्यालय मंडी और होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के कुल तीन पद, तथा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षित एक मल्टी टास्क वर्कर का पद भरा जाएगा। प्रशासनिक सेवाओं को मजबूती देने के लिए हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा के तीन पदों को भी भरने का निर्णय लिया गया है। पूर्ववर्ती कर्मचारी चयन आयोग (हमीरपुर) द्वारा जारी किए गए 80 पोस्ट कोडों के विज्ञापनों को वापस लेने की मंजूरी देते हुए, सरकार ने संबंधित अभ्यर्थियों के 4.27 करोड़ रुपये की परीक्षा फीस को वापस करने का बड़ा फैसला लिया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचे का विस्तार: प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए मंत्रिमंडल ने बड़े पैमाने पर पदों को भरने और स्वास्थ्य केंद्रों के उन्नयन की घोषणा की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में चिकित्सा अधिकारियों के 300, चतुर्थ श्रेणी/मल्टी टास्क वर्करों के 250 और 200 स्टाफ नर्सों की भर्ती को मंजूरी दी गई है। साथ ही, 162 अन्य तकनीकी पद भी भरे जाएंगे, जिनमें 76 ऑपरेशन थिएटर सहायक, 36 रेडियोग्राफर और 50 लैब तकनीशियन (ग्रेड-II) शामिल हैं। कांगड़ा जिले के सिविल अस्पताल देहरा में विभिन्न श्रेणियों के 12 पद और ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में 3 पद सृजित किए जाएंगे। अस्पतालों की क्षमता बढ़ाते हुए मंडी जिला के नागरिक अस्पताल सरकाघाट को 100 से बढ़ाकर 150 बिस्तरों का करने और सोलन जिले के नागरिक अस्पताल बद्दी को 100 बिस्तरों वाले अस्पताल में स्तरोन्नत करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, सोलन के मानपुरा में एक नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और हमीरपुर के मझेली में प्राथमिक स्वास्थ्य उप-केंद्र खोला जाएगा, जिसके लिए जरूरी पद भी सृजित किए जाएंगे।
कर्मचारी और श्रमिक कल्याण: राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और श्रमिकों को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतियों को मंजूरी दी है। मंत्रिमंडल ने विभिन्न विभागों द्वारा पहले किसी कारणवश अस्वीकृत किए जा चुके करुणामूलक नियुक्ति के मामलों पर पुनर्विचार करने का ऐतिहासिक फैसला किया है, जिसके तहत एकमुश्त विशेष उपाय के रूप में सबसे वाजिब मामलों की दोबारा जांच कर जरूरी छूट दी जाएगी। इसी तरह, डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर के छः नामित प्रोफेसरों को पात्रता अवधि में 6 से 20 दिन की कमी होने पर भी एकमुश्त विशेष छूट दी गई है। अध्ययन अवकाश (स्टडी लीव) पर जाने वाले कर्मचारियों को अब पूर्ण वेतन दिया जाएगा और जिन्होंने पहले यह अवकाश लिया था, उन्हें बकाया राशि का भुगतान होगा। 31 मार्च, 2026 तक लगातार सात वर्ष की सेवा पूरी कर चुके अंशकालिक कर्मचारियों को दैनिक वेतनभोगी बनाने की मंजूरी दी गई है, और जॉब ट्रेनीज़ को अब 15 दिन का पितृत्व अवकाश (पेटरनिटी लीव) भी मिलेगा। विभिन्न विभागों में मल्टी टास्क वर्करों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और सुव्यवस्थित करने के लिए उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया गया है।
किसान, पशुपालक और आम जनता को राहत: कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल ने कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की है। सरकार ने उन किसानों के लिए ‘कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना’ शुरू करने का निर्णय लिया है जिनकी जमीनें नीलामी के संकट में हैं; इसके तहत 3 लाख रुपये तक के कृषि लोन के ब्याज का 50 प्रतिशत हिस्सा सरकार उठाएगी, जिससे प्रदेश के 6,356 किसानों को सीधा फायदा होगा। सरकार ने भूमिहीन परिवारों और सीमांत किसानों के मानवीय सरोकारों को देखते हुए ‘रेगुलराईजेशन नीति-2026’ को मंजूरी दी है, ताकि सरकारी भूमि पर आवासीय या कृषि संबंधी पुराने कब्जों को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार नियमित किया जा सके (इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया है)। इसके अलावा, ‘ग्रेजिंग पॉलिसी-2026’ के तहत वन और पशुपालन विभाग मिलकर एक ऑनलाइन पोर्टल बनाएंगे जिससे पशुपालकों को रियल-टाइम परमिट मिल सकेंगे। घरेलू उपयोग के लिए खनिज ले जाने वाले ट्रैक्टरों की कम्पाउंडिंग फीस को 4,500 रुपये से भारी कटौती कर केवल 500 रुपये कर दिया गया है। शिमला जिले के जुब्बल, कोटखाई और रोहड़ू के 15 अग्नि प्रभावित परिवारों के लिए 84.70 लाख रुपये के विशेष राहत पैकेज को मंजूरी दी गई है, जिसमें पूरी तरह नष्ट हुए मकानों के लिए प्रति परिवार 7 लाख रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री सहारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को भी मंजूरी दी गई है।
स्वास्थ्य बीमा, नई नीतियां और बुनियादी ढांचा:बैठक में ‘हिम केयर योजना’ के तहत मिलने वाले स्वास्थ्य बीमा कवरेज को अब इंश्योरेंस मॉडल के तहत संचालित करने का फैसला किया गया है, जिसके बाद पात्र लाभार्थियों को 5 लाख रुपये के बजाय 7 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का बढ़ा हुआ स्वास्थ्य बीमा कवर मिलेगा। राज्य को नवाचार और स्टार्टअप का हब बनाने के लिए तकनीकी शिक्षण संस्थानों के लिए ‘राज्य नवाचार नीति’ को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए वर्ष 2026 से 2028 तक 2 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसके अलावा, चिकित्सा और वैज्ञानिक उपयोग के लिए भांग की खेती, प्रसंस्करण और भंडारण को विनियमित करने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश एनडीपीएस नियम, 1989 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। बिजली ढांचे को मजबूत करने के लिए कांगड़ा के पटोला में 132/33 केवी सब-स्टेशन और कंगैहण में 220 केवी स्विचिंग सब-स्टेशन के निर्माण के लिए हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड को 40 साल की लीज (पट्टा) देने की स्वीकृति दी गई है।
परिवहन, शिक्षा और सांस्कृतिक विकास: स्वरोजगार को बढ़ावा देने और प्रदूषण कम करने के लिए ‘राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना’ का चौथा चरण शुरू किया जा रहा है, जिसमें पात्र लोगों को ई-बस खरीदने पर 50 प्रतिशत और डीजल बस खरीदने पर 30 प्रतिशत की भारी सब्सिडी मिलेगी। शिक्षा और खेल के क्षेत्र में शिमला के जुब्बल स्थित ठाकुर रामलाल कन्या खेल छात्रावास को अपग्रेड करके ‘ठाकुर रामलाल राजकीय बालिका खेल विद्यालय’ बनाया जाएगा और वहाँ 23 नए पद भरे जाएंगे। साथ ही बैठक में शिक्षा सचिव ने सीबीएसई स्कूलों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति भी दी। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कांगड़ा जिले के बैजनाथ और बीड़ उप-मंडलों का पुनर्गठन कर चढ़ि़यार में लोक निर्माण विभाग (PWD) का नया उप-मंडल स्थापित किया जाएगा।
अंत में, राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान देते हुए सोलन के राज्य स्तरीय शूलिनी मेले को अब ‘राष्ट्रीय स्तर’ का दर्जा दिया गया है। चंबा के छतराड़ी स्थित मां शिव शक्ति जातर मेले और कांगड़ा के इंदौरा स्थित शिवरात्री मेले (काठगढ़) को ‘राज्य स्तरीय’, जबकि कांगड़ा के नेरटी रैत मेले, सोलन के बाड़ीधार मेले (सरयांज), चंबा के छिंज मेले (गरनोटा) और मंडी के नाहवीधार मेले (करसोग) को ‘जिला स्तरीय’ मेले का दर्जा प्रदान किया गया है।
Content Editor- Vijay
