चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित भाजपा कार्यालय पर हुए ग्रेनेड हमले ने सुरक्षा एजेंसियों को ही नहीं, बल्कि समाज को भी झकझोर कर रख दिया है। इस हमले के पीछे जो चेहरा सामने आया है, वह किसी पेशेवर अपराधी का नहीं, बल्कि एक ऐसे युवक का है जो कभी देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा UPSC में जाने के सपने देखता था। हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू (टिक्कर) का रहने वाला रूबल चौहान, जो एक बेहद सम्मानित और शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखता है, आज सलाखों के पीछे अपने किए पर पछता रहा है।
रूबल की पृष्ठभूमि जितनी गौरवशाली है, उसका वर्तमान उतना ही अंधकारमय। उसके दादा दिल्ली के संसद भवन में सेवा दे चुके हैं और पिता दिल्ली के एक सफल व्यवसायी हैं। कोटखाई से शुरुआती शिक्षा लेने के बाद रूबल बड़े अरमानों के साथ चंडीगढ़ आया था ताकि अफसर बनकर अपने परिवार का नाम रोशन कर सके। लेकिन, चंडीगढ़ की चकाचौंध में वह ‘चिट्टे’ (सिंथेटिक ड्रग्स) के ऐसे जानलेवा जाल में फंसा कि उसका विवेक और भविष्य दोनों धुंधला गए।
पुलिस तफ्तीश में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि नशे की इसी लत ने उसे खतरनाक गैंग्स के संपर्क में ला खड़ा किया। नशे की खुराक पाने की बेबसी ने उसे एक मोहरा बना दिया, जिसका इस्तेमाल आतंकियों और गैंगस्टरों ने अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए किया। आज रूबल के साथ-साथ सात अन्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं, जिनमें मुख्य साजिशकर्ता गुरतेज और अमनप्रीत सिंह भी शामिल हैं। यह घटना केवल एक अपराध की खबर नहीं है, बल्कि उन परिवारों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो अपने बच्चों को बड़े शहरों में भेजते हैं। यह सबक है कि कैसे नशा चंद दिनों में एक होनहार युवा के सपनों की अर्थी उठाकर उसे बारूद की राह पर धकेल सकता है।
By Vijay
