हिमाचल प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बद्दी अब अपनी पहचान ‘प्रदूषण के गढ़’ के रूप में बना रहा है, जो कभी ताजी हवा का पर्याय हुआ करता था। साल 2025 के अंत तक स्थिति इतनी भयावह हो गई कि बद्दी देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हो गया है। दिसंबर महीने के आंकड़े गवाही देते हैं कि यहाँ की हवा जीने लायक नहीं बची है; महीने के आधे से ज्यादा दिन हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रही और बुधवार को यहाँ का AQI 324 तक जा पहुँचा, जिसने इसे दिल्ली और नोएडा जैसे महानगरों की प्रदूषित श्रेणी के करीब खड़ा कर दिया है।
इस दमघोंटू हालात के पीछे प्रकृति से ज्यादा मानवीय लापरवाही जिम्मेदार है। बीबीएन क्षेत्र में फैला अवैध खनन, जर्जर सड़कों से उड़ती धूल, बढ़ता ट्रैफिक और उद्योगों से निकलता बेरोकटोक धुआं इस संकट के मुख्य सूत्रधार हैं। बारिश न होने के कारण ये प्रदूषक तत्व हवा में ही जम गए हैं, जिससे सांस और अस्थमा के मरीजों के लिए खतरा बढ़ गया है। विडंबना यह है कि जहाँ शिमला और मनाली जैसे पर्यटन स्थल अपनी शुद्ध हवा से पर्यटकों को लुभा रहे हैं, वहीं औद्योगिक पट्टी के कालाअंब और पांवटा साहिब जैसे क्षेत्र भी अब धीरे-धीरे बद्दी की राह पर बढ़ते दिख रहे हैं। यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो पहाड़ों की यह हरियाली सिर्फ काली धुंध में सिमट कर रह जाएगी।
By Dhruv Sharma
