नेपाल इन दिनों भीषण राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। दरअसल, सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के फैसले ने युवा वर्ग, खासकर Gen Z को भड़काया।
हिंसा और नुकसान
लगातार हो रहे प्रदर्शनों ने बीते कुछ दिनों में हिंसक रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी इमारतों, मीडिया हाउस और यहां तक कि संसद भवन को भी आग के हवाले कर दिया। प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और हालात काबू से बाहर होने पर सेना को सड़कों पर उतरना पड़ा। देश में कर्फ्यू जैसी स्थिति है।
जनहानि और घायलों की संख्या
इन प्रदर्शनों में अब तक करीब 25 से 30 लोगों की मौत हो चुकी है और हज़ार से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई पुलिसकर्मी भी इसमें शामिल हैं। अस्पतालों में घायलों का लगातार इलाज चल रहा है।
जनता की मांग
युवाओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर रोक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। प्रदर्शनकारी एक पारदर्शी और निष्पक्ष अंतरिम सरकार की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मौजूदा राजनीतिक तंत्र भ्रष्टाचार को छुपाने और जनता की आवाज़ दबाने का काम कर रहा है।
भारत और नेपाल की सीमाई स्थिति
नेपाल में बिगड़ते हालात का असर भारत पर भी दिखने लगा है। सीमावर्ती राज्यों से नेपाल जाने वाले भारतीय पर्यटकों को फिलहाल यात्रा टालने की सलाह दी गई है। कई भारतीय यात्री वहां फंसे हुए हैं और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय दूतावास ने विशेष हेल्पलाइन जारी की है।
आगे की राह
नेपाल इस समय अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। युवाओं का गुस्सा और जनता की नाराज़गी लगातार बढ़ रही है। हालांकि सेना और प्रशासन हालात पर नियंत्रण की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक स्थिरता कब लौटेगी, यह कहना मुश्किल है।
By Neeraj Verma
