नई दिल्ली: क्रिकेट जगत के सबसे बड़े महामुकाबले यानी भारत बनाम पाकिस्तान मैच पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में 15 फरवरी को होने वाले इस मैच को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने अपना अड़ियल रुख अपना लिया है। आईसीसी (ICC) के साथ हुई हालिया बैठक में PCB चीफ मोहसिन नकवी ने बॉयकॉट खत्म करने के बदले तीन ऐसी मांगें रख दी हैं, जिन्होंने खेल के गलियारों में हलचल मचा दी है।
PCB की शर्तें: क्या ये मुमकिन हैं?
पाकिस्तान ने आईसीसी के सामने जो शर्तें रखी हैं, उनमें सबसे पहली मांग रेवेन्यू शेयर को बढ़ाने की है। पाकिस्तान चाहता है कि उसे आईसीसी की कमाई से बड़ा हिस्सा मिले। दूसरी शर्त ‘हैंडशेक’ से जुड़ी है। दरअसल, एशिया कप 2025 के बाद से भारतीय खिलाड़ियों ने सुरक्षा और राजनीतिक कारणों से पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाना बंद कर दिया था, जिसे पाकिस्तान अब वापस बहाल कराना चाहता है।
हालांकि, सबसे बड़ा विवाद पाकिस्तान की तीसरी शर्त को लेकर है। PCB चाहता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय सीरीज (Bilateral Series) दोबारा शुरू की जाए। बता दें कि दोनों देशों के बीच आखिरी सीरीज 2012 में हुई थी और पिछले 16 सालों से दोनों टीमें सिर्फ आईसीसी टूर्नामेंट्स में ही टकराती हैं।
भारत का स्टैंड: समझौता नामुमकिन?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत, पाकिस्तान की द्विपक्षीय सीरीज वाली मांग को सिरे से खारिज कर सकता है। सीमा पार से बढ़ते तनाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण भारत सरकार की नीति बिल्कुल साफ है— “जब तक आतंक खत्म नहीं, तब तक क्रिकेट नहीं।” पिछले साल हुए पहलगाम हमले के बाद से भारत का रुख और भी सख्त हो गया है। ऐसे में आईसीसी के लिए यह चुनौती बन गया है कि वह कैसे इन दो चिर-प्रतिद्वंद्वियों को मैदान पर आमने-सामने लाए।
निष्कर्ष: भले ही आईसीसी रेवेन्यू और प्रोटोकॉल की मांगों पर बीच का रास्ता निकाल ले, लेकिन द्विपक्षीय सीरीज शुरू करना पूरी तरह से भारत सरकार के हाथ में है। फिलहाल की स्थिति देखते हुए 15 फरवरी के मुकाबले पर सस्पेंस बरकरार है।
By Dhruv Sharma
