सच हिमाचल ब्यूरो: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील मामले में मानवीय और न्यायसंगत फैसला सुनाते हुए सड़क हादसे के शिकार हुए 25 वर्षीय युवक के माता-पिता को बड़ी राहत दी है। अदालत ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा पहले से तय किए गए ₹4.86 लाख के मुआवजे को नाकाफी माना और इसे करीब साढ़े तीन गुना बढ़ाकर ₹16.55 लाख कर दिया है। यह फैसला सालों से न्याय की आस लगाए बैठे बुजुर्ग माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा संबल बनकर आया है।
क्या था पूरा मामला?यह दुखद घटना साल 2008 की है, जब पांवटा साहिब के भूपपुर में हुए एक सड़क हादसे में रणजीत सिंह नाम के एक होनहार युवक की असमय मौत हो गई थी। ट्रिब्यूनल ने शुरुआत में उसकी मासिक आय को बेहद कम आंकते हुए मामूली मुआवजा तय किया था, जिसे परिवार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
अदालत ने क्यों बढ़ाया मुआवजा?मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के पुराने आकलन को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने इस बात को रेखांकित किया कि मृतक रणजीत सिंह महज एक साधारण युवक नहीं था; उसके पास कंप्यूटर हार्डवेयर का डिप्लोमा था और उसने हादसे से ठीक पहले अपनी एक इंडस्ट्रियल यूनिट भी शुरू की थी। ऐसे में उसकी योग्यता और भविष्य की संभावनाओं को नजरअंदाज कर उसकी मासिक आय को केवल ₹5,000 मानना पूरी तरह गलत था।न्याय का सम्मान करते हुए हाईकोर्ट ने न सिर्फ मुआवजे की राशि को बढ़ाकर ₹16.55 लाख किया, बल्कि संबंधित बीमा कंपनी को यह पूरी राशि 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ चुकाने का सख्त निर्देश भी दिया है।
Content Writer- Vijay
