सच हिमाचल ब्यूरो: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में कानून-व्यवस्था और शांति भंग करने वालों के खिलाफ जिला पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। मामला बीते 29 मई 2026 का है, जब शिमला के डी.सी. कार्यालय स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में नगर निगम की सामान्य सभा (General House Meeting) चल रही थी। पुलिस के अनुसार इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान कुछ उपद्रवी तत्वों ने जबरन बैठक कक्ष के भीतर प्रवेश कर न केवल जोरदार नारेबाजी की, बल्कि सरकारी कार्यवाही में भी भारी बाधा उत्पन्न की। इस अप्रत्याशित हंगामे के कारण वहां कानून और व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से बिगड़ गई।
इस घटना के तुरंत बाद शिमला नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भूवन शर्मा ने थाना सदर शिमला में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं—132, 189(2), 191(2), 221 और 223 के तहत मुकदमा (अभियोग संख्या 68/2026) दर्ज कर जांच शुरू कर दीCCTV
फुटेज और सबूतों के आधार पर दबोचे गए आरोपीमामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित अन्वेषण (तफ्तीश) शुरू की। घटना स्थल के आस-पास मौजूद गवाहों के बयान, सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और वहां बने वीडियो साक्ष्यों को खंगालने के बाद पुलिस ने अगले ही दिन यानी 30 मई 2026 को तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर पकड़े
गए आरोपियों का विवरण इस प्रकार है:विजेन्द्र मैहरा (48 वर्ष): बाबा मार्किट, शिमला के रहने वाले इस आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। इसके खिलाफ पहले से ही लगभग 50 मामले दर्ज हैं।बालक राम (45 वर्ष): चिटकारा पार्क, शिमला के निवासी बालक राम पर भी पूर्व में 10 आपराधिक मामले दर्ज पाए गए हैं।विवेक कश्यप (48 वर्ष): मल्याणा, शिमला के रहने वाले विवेक कश्यप के खिलाफ भी पहले से 2 आपराधिक मामले दर्ज हैंपुलिस
का सख्त संदेश: जिला शिमला पुलिस ने साफ तौर पर कहा है कि मामले की आगे की जांच अभी जारी है और इस घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी काम में बाधा डालने, शांति भंग करने और कानून को अपने हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कानून के तहत बेहद सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Content Writer-Vijay
