सच हिमाचल ब्यूरो: सुबह की वह धूप आज काल बनकर आई थी। सिरमौर के कालाअम्ब में नेशनल हाईवे-07 पर आज खुशियाँ नहीं, बल्कि एक पिता की चीखें बिखरी पड़ी थीं। करीब साढ़े नौ बजे का वक्त था, जब 22 साल की मासूम चंचल अपने पिता के साथ स्कूटी पर सवार होकर मैनथापल से कालाअम्ब की ओर निकली थी। उसे क्या पता था कि जिस पिता की पीठ का सहारा लेकर वह सुरक्षित महसूस कर रही थी, कुछ ही पलों में वही पिता अपनी लाड़ली को अपनी ही गोद में दम तोड़ते देखने को मजबूर हो जाएगा।
रास्ते में एक बेकाबू और तेज रफ्तार डंपर ने उनकी स्कूटी को ऐसी बेरहम टक्कर मारी कि चंचल का मासूम शरीर सड़क पर जा गिरा। टक्कर इतनी जोरदार थी कि उस बिटिया ने तड़पने का वक्त भी नहीं पाया और मौके पर ही अपनी आखिरी साँसें छोड़ दीं।
सोचिए उस पिता पर क्या गुजरी होगी, जिसने अपनी बेटी को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, आज उसे अपनी आँखों के सामने लहूलुहान और बेजान सड़क पर पड़े देखा।
हादसे के बाद जहाँ पिता की रूह कांप उठी, वहीं मौके पर पहुंची पुलिस ने चंचल के निष्प्राण शरीर को कब्जे में लेकर नाहन मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। पुलिस ने उस खूनी डंपर को तो कब्जे में ले लिया है और कार्रवाई भी शुरू कर दी है, लेकिन क्या कोई कानून उस पिता की सूनी गोद और चंचल के उन अधूरे सपनों को वापस ला पाएगा, जो उस डंपर के पहियों के नीचे हमेशा के लिए कुचल दिए गए?सड़कें तो फिर से भर जाएंगी, लेकिन उस घर के आंगन में चंचल की हंसी अब कभी सुनाई नहीं देगी।
Content Writer- Vijay
