शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक बार फिर रिश्तों को कलंकित करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ की एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोपी शिक्षक को दोषी करार देते हुए जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। अदालत ने इस संवेदनशील मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को कठोर कारावास के साथ आर्थिक दंड की सजा भी सुनाई है।
यह पूरा मामला शिमला जिले के सुन्नी क्षेत्र का है, जहाँ नवंबर 2024 में पुलिस ने शिकायत दर्ज की थी। दोषी की पहचान 46 वर्षीय जय प्रकाश उर्फ जेपी के रूप में हुई है, जो तहसील सुन्नी के करयाली गांव का रहने वाला है। शर्मनाक बात यह है कि घटना के समय जय प्रकाश एक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (GSSS) में प्रवक्ता (लेक्चरर) के पद पर तैनात था। जिस गुरु पर बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी थी, उसी ने एक नाबालिग छात्रा के साथ घिनौनी वारदात को अंजाम देकर शिक्षा के मंदिर को दागदार कर दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट, रेप/पॉक्सो) ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों पर गौर करते हुए जय प्रकाश को दोषी पाया। अदालत ने पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) की धारा 10 के तहत उसे 6 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा, दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे अदा न करने की स्थिति में उसे अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
इस मामले में शिमला पुलिस की कार्यप्रणाली भी सराहनीय रही। पुलिस टीम ने पीड़िता की गोपनीयता और गरिमा का पूरा ध्यान रखते हुए बेहद संवेदनशीलता के साथ जांच पूरी की। समय पर ठोस सबूत और गवाह अदालत में पेश किए गए, जिसकी बदौलत अपराधी को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सका। इस फैसले के बाद शिमला पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बच्चों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और शिक्षण संस्थानों में इस तरह के अपराध करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी ऐसी ही त्वरित और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
Content Writer-Vijay
