हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों को लेकर सियासी हलचलें तेज हो गई हैं। पंचायती राज विभाग ने बुधवार को पुनर्सीमांकन (Delimitation) का आधिकारिक शेड्यूल जारी कर दिया है, जिससे चुनावी रणभूमि सजने का रास्ता साफ हो गया है। इस प्रक्रिया की शुरुआत 20 फरवरी को अधिसूचना जारी होने के साथ होगी। विभाग ने जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 27 फरवरी तक आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं, जिनका विश्लेषण कर 2 मार्च को प्रारंभिक प्रकाशन किया जाएगा।
विवाद निपटारे और आरक्षण की समयसीमा: प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने अपील और सुनवाई का पुख्ता इंतजाम किया है। यदि किसी को प्रारंभिक प्रकाशन पर आपत्ति है, तो वे 11 मार्च तक अपनी अपील दर्ज करा सकते हैं, जिसका निपटारा मंडलीय आयुक्त द्वारा सात दिनों के भीतर किया जाएगा। सभी बाधाओं को दूर करते हुए 20 मार्च को पुनर्सीमांकन का अंतिम प्रकाशन होगा। सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 31 मार्च होगा, जब पंचायत निर्वाचन क्षेत्रों का फाइनल आरक्षण रोस्टर जारी किया जाएगा।सुप्रीम
कोर्ट के आदेशों का पालन: आरक्षण रोस्टर जारी होते ही राज्य निर्वाचन आयोग किसी भी समय चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। राज्य सरकार और विभाग ने जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि पूरी प्रक्रिया को तय समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए, ताकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन न हो। वर्तमान में सभी संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें 31 मार्च पर टिकी हैं, क्योंकि आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही चुनावी समीकरणों की असली तस्वीर साफ होगी।
By Dhruv Sharma
