हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से अनुशासनहीनता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ माजरा तहसील के नायब तहसीलदार सहित लगभग पूरा स्टाफ ‘मेडिकल लीव’ (चिकित्सा अवकाश) का बहाना बनाकर राजस्थान के जैसलमेर में छुट्टियां मनाता हुआ पाया गया। सरकारी दफ्तर में जहां जनता अपने कामों के लिए सन्नाटा देख रही थी, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर अधिकारियों और कर्मचारियों के पर्यटन स्थलों पर मस्ती करते हुए फोटो और वीडियो जमकर वायरल हो रहे हैं। इन तस्वीरों के सार्वजनिक होने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है और सरकारी तंत्र की साख पर सवालिया निशान लग गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, माजरा के नायब तहसीलदार इंद्र कुमार और उनके अधीनस्थ कर्मचारी एक साथ छुट्टी पर चले गए थे। इस सामूहिक अवकाश के कारण तहसील कार्यालय का कामकाज पूरी तरह ठप्प हो गया, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों से अपने जरूरी काम लेकर आए ग्रामीणों को भारी असुविधा और निराशा झेलनी पड़ी। एक तरफ जनता दफ्तरों के चक्कर काटकर पसीने बहा रही थी, तो दूसरी तरफ तहसील का यह ‘बीमार’ स्टाफ जैसलमेर के रेतीले धोरों के बीच पर्यटन का लुत्फ उठा रहा था। कर्मचारियों की इस संवेदनहीनता ने प्रशासनिक हलकों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
इस गंभीर लापरवाही का संज्ञान लेते हुए एसडीएम पांवटा साहिब गुंजीत सिंह चीमा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने नायब तहसीलदार इंद्र कुमार और छुट्टी पर गए सभी कर्मियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब तलब किया है। मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब एसडीएम ने इन सभी अधिकारियों से उनकी ‘लाइव लोकेशन’ साझा करने को कहा, जिसे उपलब्ध कराने में अब तक सभी अधिकारी विफल रहे हैं। यह विफलता स्पष्ट रूप से उनके दावों और हकीकत के बीच के अंतर को बयां कर रही है।
प्रशासन की जांच की आंच केवल घूमने गए स्टाफ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि छुट्टियां मंजूर करने वाले पांवटा साहिब के तहसीलदार रविंद्र सिसोदिया भी अब जांच के घेरे में आ गए हैं। एसडीएम ने उन्हें भी नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर एक साथ इतने सारे कर्मचारियों का चिकित्सा अवकाश किस आधार पर और किन परिस्थितियों में स्वीकृत किया गया। फिलहाल, यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और माना जा रहा है कि जांच के बाद इस ‘पिकनिक गैंग’ पर बड़ी गाज गिर सकती है।
By Dhruv Sharma
