हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के शिक्षा ढांचे में एक बड़ा सुधार करते हुए 130 सरकारी स्कूलों को CBSE उत्कृष्टता विद्यालयों के रूप में संचालित करने के लिए विस्तृत गाइडलाइन्स जारी कर दी हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 100 स्कूलों के लिए शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के 2100 से अधिक पद भरे जाएंगे। इनमें 560 नियमित शिक्षक, 130 स्पेशल एजुकेटर और 390 मल्टीटास्क वर्कर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, छात्रों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए योगा टीचर, काउंसलर और विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति आउटसोर्स के माध्यम से की जाएगी।
अंग्रेजी और गणित पर विशेष जोर:
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार 400 अंग्रेजी और 400 गणित के शिक्षकों की अस्थायी नियुक्ति करने जा रही है। इनका चयन हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग के माध्यम से होगा, जिन्हें 30,000 रुपये मासिक मानदेय पर 5 वर्ष के लिए रखा जाएगा। ये शिक्षक छात्रों के लर्निंग लेवल को सुधारने के लिए मौजूदा सिलेबस के साथ-साथ एक विशेष पाठ्यक्रम भी पढ़ाएंगे। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में इन स्कूलों का माध्यम धीरे-धीरे अंग्रेजी कर दिया जाएगा और शैक्षणिक सत्र 2031-32 तक ये पूरी तरह अंग्रेजी माध्यम स्कूल बन जाएंगे।
भर्ती प्रक्रिया और चयन का आधार:
इन स्कूलों में शिक्षकों के चयन के लिए एक अलग ‘उप-कैडर’ बनाया गया है। इसमें शामिल होने के इच्छुक शिक्षकों को लिखित परीक्षा और काउंसलिंग से गुजरना होगा। जो पद इन नियुक्तियों के कारण मूल कैडर में खाली होंगे, उन्हें सीधी भर्ती के माध्यम से भरा जाएगा। गैर-शिक्षण स्टाफ जैसे क्लर्क और जेओए (IT) की कमी को विभाग के भीतर युक्तिकरण (Rationalization) और तबादलों के जरिए पूरा किया जाएगा।
प्रवेश प्रक्रिया: ‘पहले आओ, पहले पाओ’:
इन स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया पारदर्शी रखी गई है। सामान्यतः प्रवेश ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर होगा, लेकिन स्कूल अपनी आवश्यकतानुसार विभिन्न कक्षाओं के लिए बुनियादी साक्षरता परीक्षण या प्रवेश परीक्षा भी आयोजित कर सकते हैं। बालवाटिका से लेकर 12वीं कक्षा तक के लिए अलग-अलग मूल्यांकन मानक तय किए गए हैं ताकि योग्य छात्रों को सही मार्गदर्शन मिल सके।
By Dhruv Sharma
