हिमाचल प्रदेश सरकार ने सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकने और आम जनता को घायलों की मदद के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से एक बेहद प्रभावशाली और सराहनीय कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अपनी ‘नेक मददगार’ (Good Samaritan) नीति में बड़ा बदलाव करते हुए प्रोत्साहन राशि को ₹5,000 से पाँच गुना बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य दुर्घटना के तुरंत बाद के ‘गोल्डन ऑवर’ का लाभ उठाना है, क्योंकि पहाड़ी रास्तों पर समय पर मिली सहायता किसी के लिए जीवनदान साबित हो सकती है। अब यदि कोई राहगीर किसी सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुँचाकर उसकी जान बचाने में मदद करता है, तो सरकार न केवल उसे इस सम्मानजनक राशि से पुरस्कृत करेगी, बल्कि एक प्रशस्ति पत्र देकर उसके साहस की सराहना भी करेगी।
यह योजना केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मददगार व्यक्ति को पूरी कानूनी सुरक्षा और सम्मान भी प्रदान करती है। अक्सर लोग पुलिसिया कार्रवाई और अदालती चक्करों के डर से घायलों की मदद करने से कतराते थे, लेकिन नई नीति के तहत अब मददगार को अपनी पहचान बताने, थाने जाने या गवाही देने के लिए कतई मजबूर नहीं किया जाएगा। अस्पताल प्रशासन भी मददगार से किसी भी प्रकार के कागजी पचड़े या पैसों की मांग नहीं कर सकता। डॉक्टर की रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करता है कि जान बचाने वाले ‘रियल लाइफ हीरो’ को उसकी प्रोत्साहन राशि बिना किसी देरी के मिल जाए। हिमाचल सरकार की यह पहल समाज में जिम्मेदारी का भाव पैदा करने और सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है, जहाँ हर मददगार को अब सरकार का पूरा साथ और सम्मान मिलेगा।
By Dhruv Sharma
