किन्नौर: हिमाचल की शांत वादियों में बसा नालिंग-2 गाँव शुक्रवार की सुबह उस वक्त दहल उठा, जब बुधराम नामक व्यक्ति के दो मंजिला काष्ठकुणी मकान में भीषण आग लग गई। सुबह करीब 6:45 बजे जब पूरा गाँव जाग ही रहा था, तभी लकड़ी से बने इस पारंपरिक घर से धुएं के काले बादल और आग की लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया। उस समय घर के मुखिया इलाज के लिए बाहर गए थे और उनकी पत्नी भी घर पर नहीं थीं, जिससे पूरा मकान सूना था।इस आपदा के बीच मानवता और साहस की एक अद्भुत मिसाल देखने को मिली। जब मकान धू-धू कर जल रहा था, तब बुधराम का बेटा सुभाष नीचे के कमरे में गहरी नींद में सोया हुआ था। वह ऊपर मची तबाही से पूरी तरह अनजान था। धुएं को देख ग्रामीण बिना अपनी जान की परवाह किए मौके पर पहुंचे, बंद दरवाजे को तोड़ा और सुभाष को सुरक्षित बाहर निकाला। ग्रामीणों की इस तत्परता ने एक बड़े जानी नुकसान को होने से रोक लिया।हालांकि, जान तो बच गई लेकिन बुधराम के परिवार की जीवनभर की कमाई आग की भेंट चढ़ गई। रसोई सहित चारों कमरे पूरी तरह जलकर राख हो गए हैं। पंचायत प्रधान रामेश्वर नेगी ने प्रशासन को इसकी सूचना दे दी है और राजस्व विभाग नुकसान का आकलन कर रहा है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन बेघर हुए इस परिवार की मदद के लिए ग्रामीणों ने सरकार से उचित मुआवजे की पुरजोर मांग की है।
By Dhruv Sharma
