हिमाचल प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में ‘मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना’ के माध्यम से राज्य के अनाथ और निराश्रित बच्चों के जीवन में एक नई किरण जगाई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि इन युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार इन बच्चों की शिक्षा, कौशल विकास और कोचिंग का पूरा खर्च उठाने के साथ-साथ उन्हें देश भर में शैक्षणिक भ्रमण (एक्सपोज़र विजिट) पर भी भेज रही है। योजना के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा को और मजबूत करते हुए, लाभार्थियों को विवाह के लिए 2 लाख रुपये, आवास निर्माण के लिए 3 लाख रुपये की वित्तीय मदद और 3 बिस्वा भूमि देने का प्रावधान है। इसके अलावा, वस्त्र अनुदान और उत्सव भत्ता जैसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदम इस पहल को मानवीय गरिमा से जोड़ते हैं।इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा कांगड़ा जिले के लुथान में बन रहा ‘मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सुख-आश्रय परिसर’। लगभग 132 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह आधुनिक परिसर देश में अपनी तरह का पहला संस्थान होगा, जहाँ 400 आश्रितों के लिए आवास, स्वास्थ्य, पुस्तकालय और मनोरंजन जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएँ एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री का यह दृष्टिकोण कि ‘सरकार ही इन बच्चों का परिवार है’, हिमाचल को एक संवेदनशील और कल्याणकारी राज्य के रूप में स्थापित करता है। स्थानीय प्रशासन, जैसे ऊना जिला प्रशासन, भी पारदर्शिता और मुस्तैदी के साथ यह सुनिश्चित कर रहा है कि योजना का लाभ हर पात्र बच्चे तक पहुँचे, ताकि समाज का सबसे कमज़ोर वर्ग मुख्यधारा से जुड़ सके।
By Dhruv Sharma
