हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित फास्ट ट्रैक विशेष अदालत (POCSO) ने एक नाबालिग से दुष्कर्म के जघन्य अपराध में अपना फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नितिन मित्तल की अदालत ने इस मामले में एक दंपती सहित तीन लोगों को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
फैसले के मुख्य बिंदु:
- कड़ी सजा और जुर्माना: दोषियों को न केवल 20 साल की जेल हुई है, बल्कि उन पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त समय जेल में बिताना होगा।
- पीड़िता को मुआवजा: न्यायालय ने संवेदनशीलता दिखाते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया है कि पीड़िता को एक लाख रुपये का मुआवजा 30 दिनों के भीतर प्रदान किया जाए।
- साक्ष्य मिटाने की कोशिश: मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सिद्ध हुआ कि दोषी महिला ने अपराध के बाद सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया था।
घटना की पृष्ठभूमि
यह मामला सितंबर-अक्टूबर 2023 का है। पीड़िता अपनी गर्भवती बहन की देखभाल के लिए अपने रिश्तेदारों के घर गई थी। वहां उसके साथ यह घिनौना कृत्य किया गया। परिजनों द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने तत्परता से जांच की और पुख्ता सबूतों के आधार पर चार्जशीट दाखिल की।
न्याय की जीत
विशेष जिला न्यायवादी नवीना राही की प्रभावशाली पैरवी और पुलिस के सहयोग से दोषियों को उनके अंजाम तक पहुँचाया गया। इस फैसले को समाज में एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों में कानून किसी को नहीं बख्शता।
By Dhruv Sharma
