हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) अपने बेड़े को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। प्रदेश में बसों की भारी किल्लत और यात्रियों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए प्रबंधन ने अब 350 नई डीजल बसों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार के साथ-साथ, निगम ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि दुर्गम क्षेत्रों और लंबे रूटों पर कनेक्टिविटी को तुरंत सुधारा जा सके। जल्द ही होने वाली प्री-बीड मीटिंग के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस कंपनी की बसें प्रदेश की सड़कों पर दौड़ती नजर आएंगी।
कैसा होगा नई बसों का स्वरूप?
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए निगम ने बसों के चयन में विविधता रखी है:
37-सीटर बसें (250 यूनिट): इन बसों का उपयोग मुख्य रूप से लंबे रूटों और व्यस्त लोकल रूटों पर किया जाएगा।
25-सीटर बसें (100 यूनिट): इन्हें विशेष रूप से हिमाचल के चुनौतीपूर्ण और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि छोटे गांवों तक पहुंच आसान हो सके।
क्यों पड़ी नई बसों की जरूरत?
दरअसल, निगम की बसों की कमी का मुख्य कारण ‘स्क्रैप पॉलिसी’ है। सरकारी नियमों के अनुसार, हर 6 महीने में 15 साल पुरानी बसों को कबाड़ घोषित कर हटाना पड़ता है। राजधानी शिमला समेत पूरे प्रदेश के डिपो इस समय बसों की कमी से जूझ रहे हैं, जिससे समय सारणी (टाइम टेबल) प्रभावित हो रही है। निगम को उम्मीद है कि आगामी 297 इलेक्ट्रिक बसों और इन 350 डीजल बसों के आने से परिवहन व्यवस्था फिर से पटरी पर लौट आएगी।
भविष्य की योजना, छोटी बसों पर फोकस: HRTC का लक्ष्य केवल वर्तमान कमी को पूरा करना ही नहीं, बल्कि भविष्य की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना भी है। निगम का मास्टर प्लान अगले दो वर्षों के भीतर 250 छोटी बसें (25-सीटर) खरीदने का है। अभी खरीदी जा रही 100 बसों के अलावा, 150 और बसें अगले चरण में जोड़ी जाएंगी। इससे प्रदेश के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर और सुरक्षित सफर की सुविधा मिल सकेगी।
Content Writer- Vijay
