हिमाचल प्रदेश के बैंकिंग सेक्टर में उस समय हड़कंप मच गया जब सोलन स्थित जोगिंद्रा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक (JCCB) में संगठित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने नाबार्ड (NABARD) के मुख्य सतर्कता अधिकारी को एक विस्फोटक शिकायत भेजी है। इसमें बैंक के चेयरमैन मुकेश शर्मा, प्रबंध निदेशक पंकज सूद और उनके चार वरिष्ठ सहयोगियों पर बैंक को अपनी “निजी जागीर” की तरह इस्तेमाल करने और जनता के पैसे को बेरहमी से उड़ाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत के अनुसार, 1 जनवरी 2022 से बैंक के भीतर नियम-कानूनों को ताक पर रखकर वित्तीय अनियमितताओं का खेल चल रहा है। आरोप है कि बिना किसी बोर्ड मंजूरी के लाखों रुपये निजी पार्टियों, मेहमाननवाजी और विज्ञापनों पर खर्च किए गए। सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब बैंक ने रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटी (RCS) द्वारा मना किए जाने के बावजूद 30 लाख रुपये की लग्जरी इनोवा गाड़ी खरीद ली। इतना ही नहीं, कैश सॉर्टिंग मशीनों और जनरेटर की खरीद में भी 30 लाख रुपये से अधिक का भुगतान बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के कर दिया गया, जो सीधे तौर पर वित्तीय हेरफेर की ओर इशारा करता है।
अधिवक्ता का दावा है कि उन्होंने इस बाबत अब तक 25 से अधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन हर बार मामले को फाइलों में दबा दिया गया। बैंक के अधिकारियों पर पहले ही 3 एफआईआर दर्ज होने के बावजूद ठोस कार्रवाई न होना पूरे प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत पर सवाल खड़े करता है। शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते स्पेशल ऑडिट और फॉरेंसिक जांच नहीं कराई गई, तो यह बैंक सोलन के बघाट अर्बन कोऑपरेटिव बैंक जैसी बर्बादी की कगार पर पहुँच सकता है। राजनीतिक संरक्षण के आरोपों ने इस पूरे प्रकरण को अब और अधिक गंभीर बना दिया है।
By Neha Bisht
