हिमाचल प्रदेश में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने एक बार फिर से मौसम का रुख बदल दिया है। प्रदेश की ऊंची चोटियों पर ताजा हिमपात और मैदानी इलाकों में हो रही लगातार बारिश के कारण कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने वापसी कर ली है। हालांकि, शनिवार को हल्की धूप खिलने से लोगों को कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन पिछले 24 घंटों में सांगला (20.5 सेमी), कल्पा (18.2 सेमी) और केलांग (10 सेमी) समेत कई ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दर्ज की गई भारी बर्फबारी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। वहीं, शिमला, मनाली, धर्मशाला और बिलासपुर जैसे क्षेत्रों में भी 3 से 5 सेंटीमीटर तक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
मौसम के इस तल्ख तेवर का असर यातायात पर भी पड़ा है। भारी बर्फबारी और सड़कों पर फिसलन के चलते सामरिक रूप से महत्वपूर्ण अटल टनल, रोहतांग को सुरक्षा कारणों से सभी प्रकार के वाहनों के लिए बंद कर दिया गया है। पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें फिलहाल नेहरू कुंड तक ही जाने की अनुमति दी जा रही है। तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है; अधिकतम तापमान सामान्य से 6 से 15 डिग्री और न्यूनतम तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक नीचे लुढ़क गया है। शनिवार को शिमला में न्यूनतम तापमान 7 डिग्री और अधिकतम 17 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। मौसम विभाग ने 23 मार्च के लिए कुल्लू, सोलन और बिलासपुर सहित कई जिलों में ‘यैलो अलर्ट’ जारी किया है, जिसमें गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम केंद्र शिमला के पूर्वानुमान के अनुसार, 26 मार्च तक मौसम खराब रहने की संभावना है, जबकि 24 से 27 मार्च के बीच बारिश और बर्फबारी का एक और नया दौर प्रदेश में दस्तक दे सकता है। भूस्खलन और फिसलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से ऊंचे क्षेत्रों या नदी-नालों के समीप न जाने की सख्त सलाह दी है।
By Dhruv Sharma
