हिमाचल प्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) अब अपने पुराने ढर्रे को छोड़कर आधुनिक तकनीक की राह पर चलने की तैयारी में है। हाल ही में निगम प्रबंधन और कर्मचारी यूनियनों के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक ने भविष्य के परिचालन की नई रूपरेखा स्पष्ट कर दी है। मुख्य महाप्रबंधक पंकज सिंघल की अध्यक्षता में हुए इस मंथन का मुख्य केंद्र ‘डिजिटल फुटप्रिंट्स’ रहा, जिसके जरिए अब चालकों और परिचालकों की ड्यूटी का हिसाब-किताब मशीनी सटीकता से किया जाएगा।
प्रबंधन की ‘त्रिकोणीय’ सुधार रणनीति:निगम प्रबंधन ने व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए तीन प्रमुख प्रस्ताव मेज पर रखे हैं। पहला, ड्यूटी के समय का सटीक आकलन करने के लिए बसों की औसत गति सीमा को बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। दूसरा, कर्मचारियों के लिए 48 घंटे की साप्ताहिक ड्यूटी व्यवस्था लागू करने की योजना है। तीसरा, साल 2024 में लागू की गई लगेज पॉलिसी (सामान नीति) पर फीडबैक मांगा गया है ताकि यात्रियों और कर्मचारियों के बीच होने वाले रोजमर्रा के विवादों को खत्म किया जा सके।
तकनीक बनाम पहाड़ की चुनौतियां:बैठक में ‘डिजिटल ऑडिट’ के विचार पर तो सहमति दिखी, लेकिन गति सीमा बढ़ाने पर यूनियन प्रतिनिधियों ने कड़ी आपत्ति जताई। कर्मचारियों का तर्क है कि पहाड़ों में “रफ्तार नहीं, हालात” मायने रखते हैं। दुर्गम और संकरी सड़कों पर आज भी 20 किलोमीटर का सफर तय करने में 2 घंटे तक का समय लग जाता है। ऐसे में औसत गति महज 10 किमी प्रति घंटा रह जाती है। यूनियनों ने दोटूक कहा कि वर्ष 2006 के पुराने मापदंडों के आधार पर आज की परिस्थितियों का आकलन करना न केवल अतार्किक है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ भी है।
GPS और ETM बनेंगे ‘डिजिटल जज’:कर्मचारी संगठनों ने एक प्रगतिशील सुझाव देते हुए कहा कि जब बसों में GPS और परिचालकों के पास ई-टिकटिंग मशीन (ETM) मौजूद है, तो ड्यूटी की गणना काल्पनिक आंकड़ों के बजाय वास्तविक डेटा से होनी चाहिए। सर्वर पर मौजूद हर टिकट का समय, बस के रुकने का स्थान और परिचालन का एक-एक सेकंड यह बताने के लिए काफी है कि कर्मचारी ने फील्ड पर कितना समय बिताया है। इससे पारदर्शिता आएगी और विवादों की गुंजाइश खत्म होगी।
पुरानी नीतियों पर तकरार जारी:बैठक में 48 घंटे की साप्ताहिक ड्यूटी और नई लगेज पॉलिसी पर पेंच फंसता नजर आया। यूनियनों ने ‘मोटर ट्रांसपोर्ट वर्कर्स एक्ट 1961’ का हवाला देते हुए 8 घंटे से अधिक के काम को ओवरटाइम मानने की वकालत की। साथ ही, 2024 की सामान नीति को यात्री संख्या में गिरावट का कारण बताते हुए पुरानी उदार नीति बहाल करने और बिना यात्री के सामान भेजने पर दोगुना किराया वसूलने का सुझाव दिया गया है।
By Dhruv Sharma
