हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा में सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला पंचायत अधिकारी कार्यालय, धर्मशाला द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब पूरे जिले में खुली सिगरेट और बीड़ी बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बढ़ते नशे पर लगाम लगाना है। सरकार ने तंबाकू विक्रेताओं की निगरानी के लिए एक समय-सीमा तय की है, जिसके तहत 29 दिसंबर तक सभी विक्रेताओं का पंजीकरण और गणना सुनिश्चित की जानी है।इस प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए खंड विकास अधिकारियों ने पंचायत सचिवों को अपने-अपने वार्डों में सर्वे करने के आदेश दिए हैं। अब तंबाकू उत्पादों का व्यापार करने वाले प्रत्येक दुकानदार को पंचायत निधि में 500 रुपये का शुल्क जमा करवाकर लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। पंचायत सचिवों को यह विशेष शक्ति दी गई है कि वे नियमों का पालन करने वाले विक्रेताओं को 3 वर्ष की अवधि के लिए लाइसेंस जारी कर सकें। साथ ही, उन्हें यह भी रिपोर्ट देनी होगी कि अब तक कितने लाइसेंस जारी हुए और कितने आवेदन रद्द किए गए।जिला पंचायत अधिकारी विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस विकेंद्रीकृत व्यवस्था का लक्ष्य जमीनी स्तर पर तंबाकू की बिक्री को नियंत्रित करना और समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर नशामुक्त बनाना है।
By Dhruv Sharma
