शिमला: हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC (इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज) के कार्डियोलॉजी विभाग में तैनात सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर राघव नरूला इन दिनों चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। कभी अपनी मेहनत और मरीजों की सेवा के लिए ‘हीरो’ माने जाने वाले डॉक्टर राघव अब एक गंभीर विवाद और कानूनी कार्रवाई के घेरे में हैं।कैसे बने थे ‘हीरो’?डॉक्टर राघव नरूला की पहचान एक बेहद काबिल और समर्पित डॉक्टर के रूप में थी। उन्होंने IGMC के कार्डियोलॉजी विभाग में कई जटिल हार्ट सर्जरी और प्रोसीजर सफलतापूर्वक किए थे। मरीजों और उनके तीमारदारों के बीच वह अपनी मिलनसार छवि और इलाज के प्रति संजीदगी के लिए लोकप्रिय थे। कम समय में उन्होंने अस्पताल प्रशासन और जनता के बीच काफी सम्मान कमा लिया था।विवाद की शुरुआत: कैसे बने ‘विलेन’?खबरों के मुताबिक, डॉक्टर राघव पर भ्रष्टाचार और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने मरीजों को मिलने वाले स्टेंट और अन्य मेडिकल उपकरणों की खरीद में धांधली की।निजी कंपनियों से साठगांठ: आरोप है कि डॉक्टर ने कुछ खास निजी वेंडर्स के साथ मिलकर मरीजों को महंगे स्टेंट खरीदने के लिए मजबूर किया और इसके बदले मोटा कमीशन लिया।नकली बिलिंग: जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में सरकारी योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत और हिमकेयर) के तहत मिलने वाले लाभ में भी हेराफेरी की गई।अस्पताल से निलंबन: इन आरोपों के पुख्ता होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। डॉक्टर राघव नरूला को पद से निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ पुलिस केस भी दर्ज किया गया।वर्तमान स्थिति:पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है कि इस खेल में और कौन-कौन शामिल था। डॉक्टर राघव, जो कभी अपनी काबिलियत के लिए सुर्खियों में थे, अब सलाखों के पीछे या कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की साख पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं और मरीजों के भरोसे को गहरा झटका लगा है।निष्कर्ष:यह मामला एक चेतावनी की तरह है कि कैसे पेशेवर नैतिकता (Ethics) को ताक पर रखकर निजी लालच एक अच्छे करियर को तबाह कर सकता है। जो हाथ कभी जान बचाते थे, आज उन पर भ्रष्टाचार की कालिख लग गई है।
By Dhruv Sharma
