हिमाचल प्रदेश इन दिनों प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। पिछले दो दिनों से मंडी और चंबा जिलों में हालात बेहद विकट बने हुए हैं। चंबा पूरी तरह से बाकी दुनिया से कट चुका है। रावी नदी उफान पर है और भूस्खलन के कारण जगह-जगह सड़कें बंद हो गई हैं। मणिमहेश यात्रा पूरी तरह से रोक दी गई है, श्रद्धालुओं को विभिन्न स्थानों से वापस भेजा जा रहा है। इस दौरान अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है और हजारों यात्री फंसे हुए हैं।
मंडी जिला भी भारी तबाही झेल रहा है। कई सड़कें, पुल और बिजली-पानी की योजनाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। पूरे राज्य में अब तक सैकड़ों सड़कें बंद हो गई हैं, बिजली ट्रांसफार्मर और जल योजनाओं को नुकसान पहुंचा है।
विधानसभा में आज आपदा को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। प्रस्ताव लाया गया कि हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय आपदा ग्रस्त राज्य घोषित किया जाए। इस प्रस्ताव पर बहस के दौरान सत्ता और विपक्ष में तीखी नोकझोंक भी हुई, लेकिन अंततः प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज सदन में मौजूद नहीं थे क्योंकि वे बिहार में राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में शामिल होने गए थे। उनकी अनुपस्थिति में सदन में चर्चा का नेतृत्व अन्य मंत्रियों ने किया। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि आपदा के समय भाजपा मुद्दे की बजाय राजनीतिक रोटियां सेक रही है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार भले ही राष्ट्रीय आपदा घोषित न करे, लेकिन कम से कम पूरे देश को हिमाचल की स्थिति से अवगत होना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि सरकार हरसंभव मदद कर रही है। जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। नेटवर्क बहाली का काम शुरू हो चुका है और फिलहाल उपग्रह संचार से संपर्क बनाए रखा जा रहा है।
वन मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सदन में राहत व बचाव कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि NDRF, SDRF और सेना की टीमें राहत कार्यों में लगी हुई हैं और प्रभावित क्षेत्रों से हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
फिलहाल हालात बेहद गंभीर हैं, लेकिन राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
By Neeraj Verma
