25 अगस्त को हिमाचल प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही में मुख्य रूप से नियम 63 और 130 पर चर्चा हुई। रोजगार, किसानों, बागवानों, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
धर्मशाला से विधायक सुधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने रोजगार और योजनाओं से जुड़े आंकड़ों पर सदन को गुमराह किया है। इस पर विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने जवाब देते हुए कहा कि जब प्रदेश सरकार 25,000 करोड़ रुपये कर्मचारियों की पेंशन और सैलरी पर खर्च कर सकती है, तो किसानों पर 2,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना भी बनाई जा रही है। इससे किसानों के बच्चों को नौकरी के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा और वे घर बैठे 25 से 30 हजार रुपये तक कमा सकेंगे।
बागवानों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने बताया कि शिमला के ठियोग में एक बायपास बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है, जिससे बागवान अपने सेब कम भाड़े में सीधे मंडियों तक पहुँचा सकेंगे।
सत्र के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार इस क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि मियाना में रोबोटिक सर्जरी मशीन लगाई गई है और इसी तरह प्रदेश के अन्य अस्पतालों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाई जाएँगी।
शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल में प्रदेश शिक्षा रैंकिंग में 21वें स्थान से उछलकर 5वें स्थान पर पहुँच गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इस दिन सदन में मौजूद नहीं रहे। वे अपने आठ विधायकों के साथ भाजपा के एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। उनकी अनुपस्थिति में विपक्ष की कमान विपिन परमार ने संभाली और सरकार से रोजगार व किसानों के मुद्दों पर जवाब मांगा।
संक्षेप में, 25 अगस्त की कार्यवाही में रोजगार, किसान, बागवान, स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर जोरदार चर्चा हुई और मुख्यमंत्री सुक्खू ने इन क्षेत्रों में सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को सदन के सामने रखा।
By Neeraj Verma
