सच हिमाचल ब्यूरो: केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं को आर्थिक रूप से बेहद मजबूत करने के लिए 16वें वित्त आयोग (अवधि 2026-27 से 2030-31) के तहत 3,744 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को अंतिम मंजूरी दे दी है। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में ही राज्य की पंचायतों को विकास कार्यों को गति देने के लिए पहली किस्त के रूप में ₹481 करोड़ की राशि जारी कर दी जाएगी। 15वें वित्त आयोग में राज्य को लगभग ₹2,100 करोड़ मिले थे, जिसकी तुलना में यह नया आवंटन करीब दोगुना है। इससे प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत को औसतन ₹1 करोड़ तक का भारी फंड मिलेगा। हालांकि, इस बड़े खजाने के साथ ही सरकार ने वित्तीय पारदर्शिता लाने के लिए पंचायतों की ‘मनमर्जी’ पर कड़ा सरकारी पहरा लगा दिया है।
बजट खर्च करने की नई व्यवस्था: 60:40 की जगह अब लागू होगा 50:50 का नियम
16वें वित्त आयोग के लागू होने के साथ ही केंद्र और राज्य सरकार ने बजट खर्च करने के पुराने ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है:
- पुराना नियम (15वां वित्त आयोग): पहले पंचायतों को मिले बजट का 60% हिस्सा ‘टाइड’ (सरकार द्वारा तय कार्यों) और केवल 40% ‘अनटाइड’ (स्थानीय इच्छा अनुसार) मद में खर्च करने की छूट थी।
- नया कड़ा नियम (16वां वित्त आयोग): अब इस अनुपात को बदलकर 50:50 प्रतिशत कर दिया गया है। यानी कुल राशि का ठीक आधा हिस्सा (50%) अनिवार्य रूप से पेयजल प्रबंधन, स्वच्छता, वर्षा जल संचयन और ओडीएफ (ODF) को बनाए रखने जैसे बेहद जरूरी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं वाले कार्यों पर ही खर्च होगा। पंचायत प्रतिनिधि इस 50% पैसे को किसी अन्य काम में डाइवर्ट नहीं कर पाएंगे।
बाकी बचे 50% हिस्से (अनटाइड ग्रांट) को पंचायतें अपनी स्थानीय जरूरतों जैसे ग्रामीण सड़कों के निर्माण व मरम्मत, स्ट्रीट लाइट लगाने, नालियों के सुधार, और कम्युनिटी हॉल या पंचायत घरों के कायाकल्प के लिए प्रस्ताव पास करके खर्च कर सकेंगी।
जिला-वार आवंटन और सख्त एंट्री शर्तें
सरकार ने इस बात का भी खुलासा किया है कि जिलों को उनकी आबादी और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर पैसा मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, राज्य के बड़े जिलों में शामिल मंडी जिले को अगले 5 वर्षों में अकेले लगभग ₹429.11 करोड़ का बजट अलॉट किया गया है, जिसमें से ₹68.89 करोड़ इसी चालू वर्ष में पंचायत स्तर पर खर्च किए जाएंगे।
फंड रोकने की चेतावनी (एंट्री-लेवल शर्तें):
16वें वित्त आयोग की गाइडलाइंस के मुताबिक, केंद्र से यह पैसा तभी जारी होगा जब पंचायतें तीन प्रमुख शर्तों को पूरा करेंगी:
- पंचायतों के खातों का समय पर डिजिटल और फिजिकल ऑडिट (Audited Accounts) होकर पब्लिक डोमेन पर अपलोड होना चाहिए।
- नियमों के उल्लंघन या वित्तीय हेरफेर पर राज्य सरकार तुरंत कार्रवाई और फंड होल्ड करेगी।
- पंचायत स्तर पर खुद का राजस्व (Own Tax Revenue) बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
इस कड़े प्रशासनिक रुख का सीधा मकसद यह है कि केंद्र से मिलने वाले ₹3,744 करोड़ का एक-एक पैसा किसी नेता या प्रधान की व्यक्तिगत पसंद की भेंट चढ़ने के बजाय सीधे हिमाचल के ग्रामीण बुनियादी ढांचे की तस्वीर बदले।
Content Editor- Mahima
