सच हिमाचल ब्यूरो: हिमाचल प्रदेश में अब पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली में एक बड़ा और मानवीय बदलाव आया है। नए निर्देशों के अनुसार, राज्य में अब किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी “गुपचुप” तरीके से नहीं की जा सकेगी। पुलिस के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि जैसे ही किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाता है, उसके परिजनों या किसी करीबी मित्र को तुरंत इसकी सूचना दी जाए। यह कदम पारदर्शिता लाने और हिरासत में होने वाली मनमानी को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। अक्सर देखा जाता था कि गिरफ्तारी के कई घंटों बाद तक परिवार को पता नहीं चलता था कि उनका सदस्य कहाँ है, जिससे न केवल मानसिक तनाव बढ़ता था बल्कि कानूनी अधिकारों के हनन की संभावना भी रहती थी।
इस नई व्यवस्था के तहत, गिरफ्तारी के समय ही पुलिस को एक ‘अरेस्ट मेमो’ तैयार करना होगा, जिस पर परिवार के सदस्य या इलाके के किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। इसके अलावा, गिरफ्तार व्यक्ति को यह अधिकार होगा कि वह अपने वकील या परिवार से संपर्क कर सके। हिमाचल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिकारी इन नियमों की अनदेखी करता है या सूचना देने में देरी करता है, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय न केवल नागरिकों के मौलिक अधिकारों को मजबूत करता है, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास का एक नया सेतु भी बनाता है।
Content Writer-Vijay
