हिमाचल प्रदेश में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम ने रौद्र रूप धारण कर लिया है, जिससे मार्च के महीने में दिसंबर जैसी कड़ाके की ठंड लौट आई है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं, जिसमें 19 मार्च को भारी बारिश, बिजली गिरने और 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका के साथ ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। इसके अलावा, 17, 18 और 20 मार्च के लिए ‘यैलो अलर्ट’ प्रभावी रहेगा। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को अगले कुछ दिनों तक विशेष सावधानी बरतने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी है।
वर्तमान स्थिति की बात करें तो प्रदेश के ऊपरी इलाकों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में भारी बारिश व ओलावृष्टि का दौर लगातार जारी है। सोमवार को राजधानी शिमला में दोपहर के वक्त घने काले बादलों की वजह से दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा गया, जिसके बाद गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि शुरू हुई और बर्फ के फाहे गिरे। इस दौरान कल्पा में 0.4 और भरमौर में 4 सेंटीमीटर ताजा बर्फबारी दर्ज की गई, जबकि धर्मशाला में 28, मनाली में 16 और ऊना में 11.4 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। ताजा बर्फबारी के बाद कांगड़ा सहित आसपास के पूरे क्षेत्र में शीत लहर चल रही है और न्यूनतम तापमान में 3.6 डिग्री सेल्सियस की बड़ी गिरावट आई है।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। खदराला और कल्पा जैसे इलाकों में बर्फ की मोटी चादर बिछ गई है, जिससे यातायात बाधित हुआ है। विशेष रूप से अटल टनल (रोहतांग) के पास बर्फबारी के चलते सैकड़ों पर्यटक वाहन फंस गए, जिन्हें निकालने के लिए पुलिस और प्रशासन की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी रहीं। सुरक्षा कारणों को देखते हुए प्रशासन ने सोलंगनाला से आगे वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, लंबे सूखे के बाद हुई यह बारिश खेती और बागवानी के लिए संजीवनी बनकर आई है। मैदानी इलाकों में गेहूं की फसल और बागवानी क्षेत्रों में फलदार पौधों के लिए यह नमी बेहद लाभकारी मानी जा रही है, जिससे किसानों और बागवानों ने राहत की सांस ली है।
By Dhruv Sharma
