हिमाचल प्रदेश के मंडी और कुल्लू जिले की सीमा पर स्थित ग्राम पंचायत झिरी और हाट के ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विकास के नाम पर न केवल जनता के अधिकारों का हनन किया जा रहा है, बल्कि टैक्सपेयर्स के करोड़ों रुपयों को अनावश्यक प्रोजेक्ट्स में बहाया जा रहा है।
क्या है मुख्य विवाद?
ग्रामीणों के अनुसार, NHAI मंडी-कुल्लू नेशनल हाईवे के सबसे सुरक्षित हिस्से (Patch) पर एक फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव दे रहा है। विभाग का तर्क है कि यह एक ‘ब्लैक स्पॉट’ (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) है, जबकि स्थानीय लोगों और RTI से मिली जानकारी कुछ और ही कहानी बयां करती है।
प्रमुख आरोप:
गलत परिभाषा: ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित पुलिस स्टेशन से प्राप्त RTI रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थान ‘ब्लैक स्पॉट’ की श्रेणी में नहीं आता।
भ्रष्टाचार का शक: आरोप लगाया जा रहा है कि एक पूर्व विधायक और NHAI के अधिकारियों के बीच साठगांठ (Nexus) के चलते इस प्रोजेक्ट को जबरन थोपा जा रहा है।
अवैज्ञानिक कटिंग: नेशनल हाईवे पर की जा रही अवैज्ञानिक कटिंग से पहाड़ों की स्थिरता और पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है।
रोजी-रोटी का संकट: जमीन गंवाने वाले किसान (Landowners) अब खुद को ‘लैंडलूजर’ (Landloosers) महसूस कर रहे हैं, क्योंकि उनकी आय के साधन छिन रहे हैं।
‘सुरक्षित सड़क को बनाया ब्लाइंड स्पॉट’:
शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस सड़क पर पहले कोई खतरा नहीं था, वहां NHAI ने पुराने रूट को बेतरतीब ढंग से बाधित कर खुद एक ‘ब्लाइंड स्पॉट’ पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का दावा है कि इस फ्लाईओवर की कोई आवश्यकता नहीं है और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए बिना भारी खर्च के भी यातायात सुगम किया जा सकता है।
माननीय उच्च न्यायालय की शरण में ग्रामीण:
पूरे गांव को उजड़ने से बचाने के लिए ग्रामीणों ने अब कानून का दरवाजा खटखटाया है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय (Shimla) में इस प्रोजेक्ट पर रोक (Stay) लगाने के लिए याचिका दायर की गई है। ग्रामीणों ने मीडिया के माध्यम से सरकार और प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि जनता के पैसे और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा हो सके।
lBy Dhruv Sharma
