हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला सहित राज्य के अधिकांश पहाड़ी इलाकों में 23 और 24 जनवरी 2026 की रात तक हुई भारी बर्फबारी ने जनजीवन को पूरी तरह से थाम दिया है, लेकिन साथ ही पर्यटन में नई जान फूंक दी है। शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान, जाखू हिल और माल रोड पर दो फुट तक बर्फ की परत जम चुकी है। सिर्फ शिमला ही नहीं, बल्कि कुल्लू-मनाली, डलहौजी, और नारकंडा जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में भी भारी हिमपात हुआ है। लाहौल-स्पीति और किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तो पारा शून्य से कई डिग्री नीचे गिर गया है, जिससे पूरी घाटी चांदी की तरह चमक रही है।पर्यटकों का उत्साह और स्थानीय जनजीवनसैलानियों के लिए यह बर्फबारी किसी उत्सव से कम नहीं है। मनाली के सोलंग वैली और शिमला के कुफरी में पर्यटकों का हुजूम उमड़ पड़ा है, जो बर्फ के बीच स्कीइंग और स्लेजिंग का आनंद ले रहे हैं। सोशल मीडिया पर ‘विंटर वंडरलैंड’ की तस्वीरों की बाढ़ आ गई है। दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है। अटल टनल और हिंदुस्तान-तिब्बत रोड (NH-5) सहित कई संपर्क मार्ग भारी बर्फबारी के कारण अवरुद्ध हो गए हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) मशीनों के जरिए सड़कों से बर्फ हटाने का काम युद्ध स्तर पर कर रहा है ताकि आवश्यक सेवाओं और यातायात को बहाल किया जा सके।बागवानों के लिए ‘सफेद सोना’इस बर्फबारी ने हिमाचल के बागवानों के चेहरों पर खुशी ला दी है। सेब की फसल के लिए पर्याप्त ‘चिलिंग आवर्स’ (ठंडक के घंटे) की जरूरत होती है, और यह ताज़ा हिमपात सेब के बगीचों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर हुई यह बर्फबारी आने वाले सीजन में फलों की अच्छी पैदावार सुनिश्चित करेगी। हालांकि प्रशासन ने पर्यटकों को सलाह दी है कि वे ऊंचे इलाकों की ओर रुख करते समय सावधानी बरतें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें।
By Dhruv Sharma
