हिमाचल प्रदेश में इन दिनों कुदरत का एक ऐसा रहस्यमयी और डरावना चेहरा सामने आया है, जिसने वैज्ञानिकों और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। आमतौर पर पहाड़ों में कड़ाके की ठंड बर्फबारी के साथ आती है, लेकिन इस बार आसमान से बर्फ का एक फाहा गिरे बिना ही ठंड ने ‘कोल्ड टॉर्चर’ शुरू कर दिया है। शीतलहर का प्रकोप इतना भयंकर है कि सुबह के वक्त सड़कों पर पानी कांच की तरह जम रहा है, जिससे गाड़ियां अनियंत्रित होकर फिसल रही हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि बिलासपुर, हमीरपुर और मंडी जैसे मैदानी जिलों का पारा शिमला से भी नीचे गिर गया है, जो सामान्य मौसम चक्र के बिल्कुल विपरीत है।लाहौल-स्पीति के कुकुमसेरी में तापमान माइनस 10.9 डिग्री तक गोता लगा चुका है, जबकि 11 अन्य शहरों में पारा शून्य के नीचे दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने अब राज्य के लिए यैलो अलर्ट जारी करते हुए चेतावनी दी है कि आने वाले चार दिनों तक प्रदेश घने कोहरे की चादर में लिपटा रहेगा। सूरज और बादलों की लुकाछिपी के बीच 16 जनवरी तक बारिश या बर्फबारी की कोई उम्मीद नहीं है। यह ‘ड्राई स्पेल’ यानी सूखा विंटर अब एक बड़े संकट में बदल रहा है। पिछले तीन महीनों से बारिश न होने के कारण खेत प्यासे हैं और बागवानों की आंखों की नींद उड़ गई है, क्योंकि बर्फबारी के बिना सेब की फसल का भविष्य खतरे में नजर आ रहा है। यह महज ठंड नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक चुनौती है जिसने पूरे प्रदेश के जनजीवन को जकड़ लिया है।
By Dhruv Sharma
