हिमाचल प्रदेश वर्तमान में भीषण प्राकृतिक विरोधाभास के दौर से गुजर रहा है। जहाँ कोकसर जैसी ऊंची चोटियों पर ताजा हिमपात से इंद्रदेव की मेहरबानी दिख रही है, वहीं राज्य के मध्य और मैदानी इलाके पिछले तीन महीनों से बारिश की एक बूंद को तरस रहे हैं। बारिश और बर्फबारी न होने से पैदा हुए सूखे जैसे हालात अब गेहूं की फसल और सेब के बागानों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 13 जनवरी तक मौसम पूरी तरह शुष्क रहने की संभावना है, जिससे फिलहाल राहत की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।राज्य में ठंड का प्रकोप अपने चरम पर है। राजधानी शिमला में इस सीजन की सबसे सर्द रात (1.5°C) दर्ज की गई, जबकि ताबो और कुकुमसेरी जैसे इलाकों में पारा गिरकर -9 डिग्री सेल्सियस के नीचे पहुँच गया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के 9 शहरों में तापमान शून्य से नीचे रिकॉर्ड किया गया है। मैदानी इलाकों में शीतलहर और घने कोहरे का ‘यैलो अलर्ट’ जारी किया गया है, जिसने यातायात और आम जनजीवन को प्रभावित किया है। शिमला और मनाली जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल अब भी सीजन की पहली बर्फबारी के इंतजार में हैं, जबकि शुष्क ठंड के कारण बुजुर्गों और वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
