मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य बिजली बोर्ड (HPSEBL) के कामकाज में बड़े डिजिटल और प्रशासनिक सुधार किए हैं, जिससे बोर्ड के खर्चों में भारी कटौती दर्ज की गई है। सरकार ने पारदर्शी खरीद प्रक्रिया और आउटसोर्सिंग पर निर्भरता कम करके बिजली बिलिंग और ईआरपी (ERP) सेवाओं पर होने वाले सालाना खर्च को 12.29 करोड़ रुपये से घटाकर 6.68 करोड़ रुपये कर दिया है। इस 46 प्रतिशत की कटौती से सरकार को हर साल लगभग 5.61 करोड़ रुपये की सीधी बचत होगी, जिसका उपयोग जन कल्याण के कार्यों में किया जाएगा।इन सुधारों का सीधा लाभ प्रदेश के लगभग 29 लाख घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को मिलेगा। डिजिटलीकरण के माध्यम से अब नए कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन, स्मार्ट बिलिंग, प्रीपेड सेवाएं और शिकायतों का डिजिटल निवारण जैसी सुविधाएं आसान हो गई हैं, जिससे उपभोक्ताओं के समय की बचत होगी और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। मुख्यमंत्री का लक्ष्य तकनीक और बेहतर डेटा प्रबंधन के जरिए बिजली बोर्ड को वित्तीय रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वर्ष 2027 तक एक आधुनिक हिमाचल प्रदेश के संकल्प को पूरा किया जा सके।
By Dhruv Sharma
