हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) और अंत्योदय परिवारों की सूचियों में किए गए बड़े बदलावों के कारण प्रदेश में एक व्यापक छंटनी देखने को मिली है। सरकार द्वारा जारी नई और सख्त गाइडलाइंस के चलते लगभग 90 फीसदी परिवार इन सूचियों से बाहर हो गए हैं। मुख्य रूप से ग्राम सभाओं में कोरम पूरा न होने के कारण, सरकार ने चयन की जिम्मेदारी एसडीएम की अध्यक्षता वाली खंड स्तरीय समितियों को सौंपी थी। इन समितियों ने पटवारियों, सचिवों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के आधार पर 31 दिसंबर 2025 तक सूचियों को अंतिम रूप दिया, जिसके परिणामस्वरूप लाखों परिवारों का नाम पात्रता सूची से काट दिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम:
प्रदेश सरकार ने शुरुआत में बीपीएल सूचियों को अंतिम रूप देने के लिए 15 अक्टूबर 2025 की समयसीमा तय की थी, लेकिन ग्राम सभाओं में कोरम की कमी के कारण यह कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, सरकार ने एसडीएम, बीडीओ और पंचायत इंस्पेक्टर की एक विशेष कमेटी गठित की। इस कमेटी को ग्राम सभा की सिफारिश के बिना ही पात्र परिवारों का चयन करने के अधिकार दिए गए। आंकड़ों की बात करें तो जसवां-प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र में 2,959 परिवारों को सूची से हटा दिया गया और केवल 278 परिवार ही पात्र पाए गए।
इसी तरह देहरा विधानसभा क्षेत्र में भी स्थिति काफी चिंताजनक रही, जहां 3,946 पुराने परिवारों में से 3,751 परिवारों की छुट्टी कर दी गई और केवल 195 नए परिवारों को ही जगह मिल सकी। स्थानीय पंचायत प्रधानों का कहना है कि सरकार द्वारा थोपी गई जटिल शर्तों के कारण पात्र गरीब परिवार भी इस सुविधा से वंचित हो गए हैं। उदाहरण के तौर पर, घियोरी पंचायत में 182 परिवारों में से मात्र 5 का ही चयन हो पाया। हालांकि, विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि यह पूरी प्रक्रिया सरकार द्वारा निर्धारित सख्त दिशा-निर्देशों और पारदर्शिता के साथ पूरी की गई है।
By Dhruv Sharma
