हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से एक ऐसा रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों के विश्वास और इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। झारखंड का रहने वाला गोविंद राम, जिस पर पहले से ही अपनी पहली पत्नी की हत्या का काला दाग था, उसने एक बार फिर अपनी क्रूरता का परिचय देते हुए अपनी दूसरी पत्नी, गुड़िया देवी की बेरहमी से हत्या कर दी। यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक आदतन अपराधी द्वारा कानून की मर्यादाओं को दी गई खुली चुनौती है।
रॉड से वार और दीवार पर खून के निशानवारदात वाली रात के मंजर को याद कर जांच अधिकारियों के भी पैर कांप उठे। जानकारी के मुताबिक, गोविंद राम ने अपने दो भाइयों, बंसी चौहान और गुड्डू के साथ मिलकर इस खूनी खेल की पटकथा लिखी। तीनों ने पहले शराब का जमकर सेवन किया और फिर नशे के उन्माद में गुड़िया देवी पर लोहे की रॉड से हमला बोल दिया। प्रहार इतने घातक और बर्बर थे कि कमरे की दीवारें खून की छीटों से लाल हो गईं। बिस्तर और फर्श पर बिखरे साक्ष्य उस रात की चीख-पुकार और हैवानियत की गवाही दे रहे हैं।
साजिश: सेप्टिक टैंक में ‘कब्र’ और सीमेंट की दीवारहत्या के बाद आरोपियों ने सबूत मिटाने के लिए शातिर दिमाग का इस्तेमाल किया। उन्होंने गुड़िया के शव को घर के पास बने सेप्टिक टैंक में फेंक दिया और बदबू न फैले, इसके लिए टैंक के ढक्कन को सीमेंट से पूरी तरह सील कर दिया। ऊपर से बोरियां डाल दी गईं ताकि किसी को शक न हो। लेकिन कहते हैं कि ‘गुनाह कितना भी गहरा दफन हो, बाहर आ ही जाता है’। पुलिस की मुस्तैदी ने इस ‘कंक्रीट की कब्र’ का राज फाश कर दिया।
कानूनी ढील पर बड़ा सवालइस मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू गोविंद राम का पिछला रिकॉर्ड है। वह झारखंड में अपनी पहली पत्नी के कत्ल का मुख्य आरोपी है। अब बिलासपुर पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि आखिर पहली पत्नी का हत्यारा जेल से बाहर कैसे था और क्या उसने कानूनी प्रक्रिया की खामियों का फायदा उठाकर एक और बेगुनाह की जान ले ली। एसपी संदीप धवल के नेतृत्व में पुलिस की एक विशेष टीम झारखंड भेजी गई है, ताकि फरार तीनों भाइयों को उनके अंजाम तक पहुँचाया जा सके।
By Dhruv Sharma
