मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विधायक प्राथमिकताओं को निर्धारित करने के लिए ऊना, हमीरपुर और सिरमौर जिलों के विधायकों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान नाबार्ड के माध्यम से 713.87 करोड़ रुपये की 73 योजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें मुख्य रूप से लोक निर्माण और जल शक्ति विभाग की परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने अधिकारियों को 15 मार्च, 2026 तक बजट का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने और प्रतिपूर्ति दावे जमा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने पिछले तीन वर्षों की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए राज्य को आत्मनिर्भर और हरित ऊर्जा संपन्न बनाने के संकल्प को दोहराया।बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने 16वें वित्त आयोग द्वारा ‘राजस्व घाटा अनुदान’ (Revenue Deficit Grant) बंद करने के निर्णय पर कड़ी चिंता जताई। उन्होंने इसे हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश को लगभग 50,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान होगा। उन्होंने केंद्र सरकार पर सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना के विरुद्ध काम करने और बजट में बागवानों व रेल परियोजनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने केंद्र से इस अनुदान को बहाल करने और हिमाचल के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की ताकि राज्य की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी रहे।विभिन्न क्षेत्रों के विधायकों ने भी अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की मांगें मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं। ऊना जिले के विधायकों ने मंदिरों के विस्तार, पुलों के निर्माण और सीवरेज व्यवस्था को बेहतर करने पर जोर दिया। हमीरपुर जिले से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, नए बस अड्डों के निर्माण और पेयजल योजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग उठी। वहीं सिरमौर जिले के विधायकों ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने, मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की कमी दूर करने और बिजली-सड़क नेटवर्क को मजबूत करने का आग्रह किया। बैठक में उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री सहित कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इन सुझावों के आधार पर विकास गति तेज करने का भरोसा दिया।
By Dhruv Sharma
