29 अगस्त 2025 को हिमाचल प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही पूरी तरह से भारी बारिश और आपदा से हुए नुकसान पर केंद्रित रही, सदन में राज्य सरकार ने बताया कि लगातार बारिश, भूस्खलन और बाढ़ से प्रदेश को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है, सड़कें, पुल, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, हजारों लोग राहत शिविरों में ठहरे हुए हैं। विपक्ष ने मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर कड़ा विरोध जताया और सरकार पर आपदा प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किए, हंगामे के बीच कार्यवाही कुछ देर के लिए बाधित भी रही। इसके बावजूद सदन ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र सरकार से आग्रह किया गया कि हिमाचल में हुई तबाही को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए ताकि राज्य को विशेष वित्तीय सहायता मिल सके।
इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि एचआरटीसी के पेंशनरों को आज ही उनकी पेंशन जारी कर दी जाएगी। वहीं सदन में अवैध कब्जे हटाने का मामला, जॉब ट्रेनी भर्ती, री-इम्प्लायमेंट, पंजाबी व उर्दू भाषा अध्यापकों की नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति पर गए शिक्षकों से जुड़े सवाल भी उठे। इन सबके चलते विधानसभा का पूरा दिन राजनीतिक हलचल और तीखी बहसों से भरा रहा।
By Neeraj Verma
