हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र अपने सातवें दिन भी गरमाया रहा। 27 अगस्त को, सदन में सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भाजपा विधायकों के बीच कई मुद्दों पर जोरदार बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। इस दौरान “असंसदीय शब्दों” का इस्तेमाल भी हुआ, जिसने सदन की कार्यवाही को प्रभावित किया। मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में उपमुख्यमंत्री ने सीएम के जवाब दिए।
मुख्य विषय और बहस
- “असंसदीय शब्दों” पर हंगामा:
दिन की कार्यवाही की शुरुआत में ही राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और विपक्षी नेता जयराम ठाकुर के बीच शब्दों को लेकर तीखी बहस हुई। भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने आरोप लगाया कि राजस्व मंत्री ने विपक्ष के नेता के खिलाफ असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के सदस्यों ने हंगामा किया, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को कार्यवाही को दोपहर के भोजन तक के लिए स्थगित करना पड़ा। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सदन में तनाव पैदा करने वाले “अभद्र शब्दों” को रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा। - एपीएमएमसी दुकान आवंटन में अनियमितता के आरोप:
विपक्ष ने एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी (APMC) शिमला-किन्नौर के तहत दुकानों के आवंटन में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। भाजपा विधायकों सुधीर शर्मा, रणधीर शर्मा और बलबीर वर्मा ने आरोप लगाया कि पराला, शिलारू और टुटू की मंडियों में 70 दुकानों का आवंटन गलत तरीके से किया गया। उन्होंने इस मामले में न्यायिक और सतर्कता जांच की मांग करते हुए सभी आवंटनों को रद्द करने की मांग की। हालांकि, कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आवंटन 2021 की नीति के अनुसार ही हुए थे और दस्तावेजों की कमी के कारण ही कुछ आवेदन रद्द किए गए थे। - औद्योगिक नीति और रोजगार पर चर्चा:
सदन में राज्य में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन पर भी बहस हुई। भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने पिछली भाजपा सरकार पर मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद से कई औद्योगिक इकाइयां राज्य छोड़ रही हैं, जिससे बेरोजगारी बढ़ रही है। इस पर विपक्ष ने वॉकआउट भी किया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जवाब में कहा कि कांग्रेस सरकार राज्य के संसाधनों को लूटने वालों के खिलाफ जानकारी जुटा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार नई औद्योगिक नीति लाने पर विचार कर रही है ताकि निवेश को बढ़ावा दिया जा सके। - मानसून आपदा पर चर्चा:
मानसून सत्र में राज्य में भारी बारिश और आपदा की स्थिति पर भी चर्चा हुई। पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सदन को बताया कि 24 से 26 अगस्त के बीच भारी बारिश से विभाग को लगभग 158 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसमें अकेले कुल्लू में 30 करोड़ का नुकसान शामिल है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ने आपदा प्रभावित जिलों, विशेष रूप से चंबा, कांगड़ा और कुल्लू में राहत और बचाव कार्यों की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई।
प्रमुख घटनाक्रम - “असंसदीय शब्दों” को लेकर सदन में हंगामा, जिसके बाद कार्यवाही स्थगित हुई।
- मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों के बाद विपक्ष का सदन से वॉकआउट।
- एपीएमएमसी दुकानों के आवंटन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस।
- पीडब्ल्यूडी मंत्री द्वारा मानसून से हुए भारी नुकसान की जानकारी देना।
- विधानसभा अध्यक्ष द्वारा आपदा की स्थिति पर उच्च-स्तरीय बैठक का आह्वान।
By Neeraj Verma
