सच हिमाचल ब्यूरो: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को झटका देते हुए एक नियमित कर्मचारी की बर्खास्तगी को पूरी तरह से गैर-कानूनी घोषित कर दिया है। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि कर्मचारी को सभी पुराने वित्तीय और सेवा लाभों (Back Wages) के साथ तुरंत पद पर बहाल किया जाए। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने साफ किया कि किसी भी नियमित सरकारी सेवक को बिना उचित विभागीय जांच और चार्जशीट के नौकरी से हटाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है।
अदालत ने सरकारी रिकॉर्ड का संज्ञान लेते हुए पाया कि इस मामले में कानूनी प्रक्रिया को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया था। कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का कोई मौका ही नहीं दिया गया, जिसके चलते कोर्ट ने 19 अप्रैल 2025 और 31 मई 2025 को जारी सरकारी टर्मिनेशन आदेशों को पूरी तरह से रद्द कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को यह छूट जरूर दी है कि वह चाहे तो कानून के दायरे में रहकर और तय प्रक्रिया का पालन करते हुए नए सिरे से अनुशासनात्मक जांच (Disciplinary Inquiry) शुरू कर सकती है।
इस मामले की शुरुआत साल 2012 में हुई थी, जब याचिकाकर्ता को एक प्रोजेक्ट के तहत अनुबंध (Contract) पर प्रोग्रामर नियुक्त किया गया था। साल 2020 में विभागीय स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश के बाद उनकी सेवाओं को नियमित भी कर दिया गया। लेकिन फरवरी 2025 में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव ने एक शिकायत पर कार्रवाई करते हुए उनकी शुरुआती नियुक्ति और नियमितीकरण को नियमों के खिलाफ मानकर उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया था, जिसे अब हाईकोर्ट ने पूरी तरह पलट दिया है।
Content Writer- Vijay
