मर्चेंट नेवी में पहली बार ड्यूटी पर निकले पालमपुर के रक्षित चौहान अब अमेरिका और रूस के बीच जारी तनाव की भेंट चढ़ गए हैं। अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने जिस रूसी तेल टैंकर ‘मैरिनेरा’ को जब्त किया है, रक्षित उसी चालक दल का हिस्सा हैं।हिमाचल प्रदेश के पालमपुर का एक परिवार इन दिनों अंतरराष्ट्रीय राजनीति की उस आग में झुलस रहा है, जो सात समंदर पार अमेरिका और रूस के बीच लगी है। सिद्धपुर (वार्ड-7) निवासी रक्षित चौहान, जो अगस्त 2025 में बड़े उत्साह के साथ मर्चेंट नेवी में अपनी पहली नौकरी पर गए थे, आज अमेरिकी कोस्ट गार्ड की हिरासत में हैं। रक्षित रूसी झंडे वाले तेल टैंकर ‘मैरिनेरा’ (पुरानी नाम: बेल्ला 1) पर तैनात थे। 7 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में इस जहाज को यह कहते हुए जब्त कर लिया कि यह वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था।रक्षित के पिता रंजीत सिंह चौहान ने भावुक होते हुए बताया कि उनकी बेटे से आखिरी बात 7 जनवरी को हुई थी, जब रक्षित ने बर्फीले तूफान की चेतावनी देते हुए कुछ दिन संपर्क न होने की बात कही थी। लेकिन कुछ ही घंटों बाद खबर आई कि जहाज को अमेरिका ने अपने कब्जे में ले लिया है। इस जहाज पर कुल 28 सदस्य थे, जिनमें रक्षित सहित केवल 3 भारतीय हैं, जबकि अन्य यूक्रेन, रूस और जॉर्जिया के नागरिक हैं। परिवार के लिए यह समय और भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि फरवरी में रक्षित के बड़े भाई की शादी है और घर में खुशियों की जगह अब सन्नाटा पसरा हुआ है।यह मामला अब कूटनीतिक रूप ले चुका है। रूस ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन बताया है, वहीं भारत में रक्षित के परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से गुहार लगाई है। कांगड़ा प्रशासन ने रक्षित के दस्तावेज विदेश मंत्रालय को भेज दिए हैं। देवभूमि का यह युवा फिलहाल एक ऐसी लड़ाई का हिस्सा बन गया है जिससे उसका कोई लेना-देना नहीं था। अब सबकी निगाहें भारत सरकार की उस कूटनीतिक पहल पर हैं जो रक्षित की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित कर सके।
By Dhruv Sharma
