हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष दिवाली का पावन पर्व पूरे उत्साह, पारंपरिक गौरव और नई उम्मीदों के साथ मनाया गया। शिमला की हसीन वादियों से लेकर मंडी और कांगड़ा के मैदानी इलाकों तक, देवभूमि दीयों की रोशनी और खुशियों से सराबोर हो उठी।
हिमाचल की विशिष्ट संस्कृति को दर्शाते हुए, यह त्योहार न सिर्फ शाम की लक्ष्मी पूजा तक सीमित रहा, बल्कि दिनभर उत्सव और लोक-परंपराओं का माहौल बना रहा। लोगों ने पारंपरिक पकवान बनाए, घरों को सजाया और एक-दूसरे को बधाई देकर खुशियाँ बांटी।
मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ मनाया ‘दीपोत्सव’
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस दिवाली को खास बनाते हुए, शिमला के टूटीकंडी बाल आश्रम में बच्चों के साथ समय बिताया। दिन के समय की गई यह मुलाकात उत्सव का एक मार्मिक हिस्सा रही। मुख्यमंत्री ने बच्चों को मिठाई और उपहार वितरित किए, और उनके साथ हंसी-खुशी के पल साझा किए।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि ये बच्चे ‘राज्य के बच्चे’ हैं और सरकार इनकी शिक्षा और भविष्य की पूरी जिम्मेदारी लेगी। उन्होंने बच्चों के लिए राज्यस्तरीय खेल दिवस आयोजित करने की भी घोषणा की, जो यह दर्शाता है कि सरकार वंचितों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। बाद में, मुख्यमंत्री ने अपने निवास पर भी परिवार के साथ दीवाली की पारंपरिक पूजा की।
नेता प्रतिपक्ष और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की शुभकामनाएँ
प्रदेश के अन्य राजनीतिक हस्तियों ने भी दीवाली के इस त्योहार को बड़े उत्साह के साथ मनाया और प्रदेश की जनता को शुभकामनाएं दीं:
नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने परिवार और समर्थकों के साथ दीपोत्सव मनाया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कामना की कि प्रकाश का यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और नई ऊर्जा का संचार करे।
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी अपने पैतृक स्थान पर परिवार के साथ पूजा-अर्चना की और प्रदेश की जनता को एकता और सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी लोगों को बधाई दी और उम्मीद जताई कि यह त्योहार प्रदेश के लिए खुशहाली और प्रगति लेकर आएगा।
प्रदेशभर में दिखा पारंपरिक और आधुनिक उत्साह
शाम होते ही, पूरे हिमाचल में घरों, मंदिरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर मिट्टी के दीये और रंगीन लाइटें जगमगा उठीं। लोगों ने पारंपरिक पहाड़ी रीति-रिवाजों के साथ लक्ष्मी-गणेश की पूजा की।
हिमाचल की यह दिवाली, जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री द्वारा सामाजिक संदेश देने वाली पहल के लिए याद रखी जाएगी, वहीं दूसरी ओर सभी राजनीतिक और गैर-राजनीतिक हस्तियों द्वारा पर्व को पारंपरिक सौहार्द के साथ मनाने के लिए भी जानी जाएगी।
By Neeraj Verma
