हिमाचल प्रदेश की लाहौल-स्पीति घाटी को देश के पहले शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिज़र्व के रूप में यूनेस्को के मानव और बायोस्फीयर (MAB) कार्यक्रम के तहत मान्यता मिली है। चीन के हांगझोउ में आयोजित 37वीं अंतरराष्ट्रीय परिषद (MAB-ICC) बैठक में यह सम्मान औपचारिक रूप से प्रदान किया गया।
इस उपलब्धि के साथ भारत के कुल बायोस्फीयर रिज़र्व की संख्या अब 13 हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह हिमाचल की अनूठी पारिस्थितिकी, संस्कृति और विरासत को वैश्विक पहचान दिलाएगा। उन्होंने वन विभाग और वन्यजीव विंग को बधाई दी और कहा कि यह मान्यता न केवल प्रदेश के संरक्षण प्रयासों को मजबूती देगी बल्कि स्थानीय युवाओं को इको-टूरिज्म और आजीविका के नए अवसर भी प्रदान करेगी।
स्पीति कोल्ड डेजर्ट बायोस्फीयर रिज़र्व 7,770 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और इसमें पिन वैली नेशनल पार्क, किब्बर अभयारण्य, चंद्रताल आर्द्रभूमि और सरचू मैदान शामिल हैं। यह क्षेत्र हिम तेंदुए, तिब्बती भेड़िये, आइबेक्स और 800 से अधिक नीली भेड़ों समेत दुर्लभ वन्यजीवों का घर है। यहां 655 जड़ी-बूटियों और 47 औषधीय पौधों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं।
प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यजीव) अमिताभ गौतम ने कहा कि यह मान्यता स्पीति को वैश्विक संरक्षण मानचित्र पर और मज़बूत बनाएगी तथा अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान सहयोग और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देगी।
By Neeraj Verma
