हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र 18 अगस्त से 2 सितंबर 2025 तक चलने वाले अपने 12 दिनों में 98% उत्पादकता के साथ राज्य के इतिहास का सबसे उत्पादक और लाम्बा सत्र बनकर उभरा। इस दौरान 509 तारांकित और 181 गैर-तारांकित प्रश्न पूछे गए, 12 विषयों पर चर्चा हुई और कुल 11 महत्त्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सत्र के दौरान राज्य को ‘आपदा-प्रभावित’ घोषित किया और केंद्र से विशेष राहत पैकेज की अपील की, ताकि नदियों, सड़कों और फसलों को हुए भारी नुकसान की भरपाई हो सके। उन्होंने ढाई सौ करोड़ रुपये का नुकसान (इसके आसपास) बताया और कहा कि यह बदलते मौसम और वैश्विक तापमान वृद्धि का सीधा परिणाम है।
विदेशी मित्रों के लिए भी प्रस्तावित सुधारों में पंचायती राज विधेयक शामिल है, जिसके तहत भ्रष्टाचार में दोषी पाए जाने वाले पंचायत प्रधान अब चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इसके अलावा, निजी भूमि पर बने सार्वजनिक उपयोगिता के ढांचों के संरक्षण वाले बिल को भी पारित किया गया, जिससे बड़े विवादों के बाद जनता को स्थायित्व मिलेगा।
अंतिम दिन का नाटक — विधायक वॉकआउट और आरोपों का बवंडर:
आज सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आग उगलते बयान सामने आए। नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने मुख्यमंत्री की पत्नी के देहरा उपचुनाव में कथित धांधली का आरोप लगाया और “वोट चोरी अभियान” चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने RTI के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों का हवाला देते हुए, महिला मंडलों को दिए गए धन का खुलासा किया — जिसके जवाब सरकार स्पष्ट नहीं कर पाई।
इसी बीच, विपक्ष ने सरकार द्वारा “सही जवाब नहीं देने” और आपदा राहत में कथित ढिलाई पर नाराजगी जताते हुए वॉकआउट किया, जिससे सदन का माहौल तनावपूर्ण हो उठा।
एक नजर में: प्रमुख उपलब्धियाँ और घटनाएं:
| प्रमुख बातें | विवरण |
|---|---|
| उत्पादकता | 98% — यह हिमाचल विधानमंडल का सबसे सफल मॉनसून सत्र साबित हुआ |
| मुख्य घोषणाएं | ‘आपदा-प्रभावित राज्य’ घोषित, केंद्र से विशेष राहत पैकेज की मांग |
| पारित विधेयक | 11 विधेयक — पंचायत प्रधानों पर भ्रष्टाचार प्रतिबंध, भूमि संरक्षण, भर्ती पारदर्शिता आदि |
| राजनीतिक तनाव | प्रश्नकाल में वॉकआउट — धांधली व भ्रष्टाचार के आरोप |
| धांधली का आरोप | CM की पत्नी के चुनाव में अनियमितता का आरोप और वोट-फॉर-मनी की शिकायत |
यह सत्र हिमाचल की दूरगामी योजनाओं, आपदा से निपटने की रणनीतियों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की चुनौतियों से भरा रहा।
By Neeraj Verma
