1. स्वास्थ्य सेवाओं का आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण
सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए 1,617.40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम परियोजना को मंजूरी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य मेडिकल कॉलेजों और सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों को इतना सक्षम बनाना है कि प्रदेशवासियों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए चंडीगढ़ या दिल्ली न जाना पड़े।
- नए पदों का सृजन: नाहन मेडिकल कॉलेज में इम्यूनोहेमेटोलॉजी विभाग की स्थापना होगी। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग में 150 सहायक स्टाफ नर्स, 40 फार्मेसी अधिकारी, 30 रेडियोग्राफर और 10 फूड सेफ्टी ऑफिसर के पदों को भरने की मंजूरी दी गई है।
- उपकरण और लैब: नूरपुर, बद्दी और ऊना में नई ड्रग टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा, राज्य के सभी अस्पतालों में बायोमेडिकल उपकरणों के रख-रखाव के लिए एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।
2. शिक्षा क्षेत्र में सुधार और डिजिटल क्रांति
शिक्षा के स्तर को सुधारने और स्कूलों को आधुनिक बनाने के लिए मंत्रिमंडल ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं:
- सीबीएसई स्कूल और भर्तियां: प्रस्तावित सीबीएसई स्कूलों के लिए 600 शिक्षकों (संस्कृत, शारीरिक शिक्षा, संगीत और ड्राइंग) के पद सृजित किए गए हैं, जिन्हें राज्य चयन आयोग के माध्यम से पारदर्शी तरीके से भरा जाएगा।
- डिजिटल क्लासरूम: प्रदेश के 777 अतिरिक्त स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम प्रोजेक्ट को विस्तार दिया जाएगा।
- स्कूलों का विलय: बेहतर प्रबंधन के लिए राज्य के 31 बालक-बालिका स्कूलों को सह-शिक्षा (Co-ed) स्कूलों में बदला जाएगा।
3. महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने समाज के संवेदनशील वर्गों के लिए कई राहत भरी घोषणाएं की हैं:
- मातृत्व अवकाश: महिला होम गार्ड स्वयंसेवकों को अब 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलेगा, जिससे वे अपने शिशु की बेहतर देखभाल कर सकेंगी।
- इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना: इस योजना में संशोधन कर विधवाओं की बेटियों को व्यावसायिक पाठ्यक्रमों (Vocational Courses) के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। यदि हॉस्टल की सुविधा नहीं है, तो उन्हें 3,000 रुपये प्रति माह किराया भी दिया जाएगा।
- दिव्यांग विवाह अनुदान: दिव्यांगों के सम्मानजनक जीवन के लिए विवाह सहायता राशि में भारी वृद्धि की गई है। 70% से अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए यह राशि 50,000 से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है।
4. बुनियादी ढांचा और नई नीतियां
- रोड ड्रेनेज और रिपेयर: सड़कों की उम्र बढ़ाने और हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित करने के लिए ‘रोड ड्रेनेज नीति’ और ‘पैच रिपेयर SOP’ को मंजूरी दी गई है। अब सड़कों के गड्ढों की मरम्मत राष्ट्रीय मानकों के अनुसार होगी।
- आबकारी और टोल नीति: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी और टोल टैक्स बैरियर नीतियों को मंजूरी दी गई है, जिससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी।
- रोजगार के अन्य अवसर: भर्ती निदेशालय में 190 कनिष्ठ अभियंता (Civil) और 151 JOA (IT) के पदों सहित विभिन्न विभागों में सैकड़ों नए पदों के सृजन को हरी झंडी मिली है।
5. खेल और कौशल विकास
- चंबा जिले में एक नया डिजिटल विश्वविद्यालय और कौशल विकास केंद्र स्थापित किया जाएगा।
- खेलों को बढ़ावा देने के लिए बिलासपुर में हैंडबॉल, शिलाई में कबड्डी (बालिका), चौपाल में वॉलीबॉल (बालक) और जुब्बल में बॉक्सिंग छात्रावासों की स्थापना और क्षमता विस्तार को मंजूरी दी गई है।
निष्कर्ष:
आज की कैबिनेट बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु ‘आत्मनिर्भर हिमाचल’ रहा। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में निवेश और बड़े पैमाने पर भर्तियों के निर्णय से राज्य की अर्थव्यवस्था और जनसुविधाओं में दूरगामी सुधार देखने को मिलेंगे।
By Dhruv Sharma
