शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल में पुलिस ने नशे के सौदागरों और सेवन करने वालों पर नकेल कसते हुए एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। चिड़गांव पुलिस की टीम ने गश्त के दौरान गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए चार युवकों को रंगे हाथों दबोचा है। इस गिरफ्तारी ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है, क्योंकि पकड़े गए आरोपियों में जल शक्ति विभाग का एक सरकारी कर्मचारी भी शामिल है। यह घटना सरकारी तंत्र में पैठ बना चुके नशे के जाल की ओर इशारा करती है, जिसे लेकर स्थानीय प्रशासन अब और भी सतर्क हो गया है।
सुबह की गश्त और गुप्त सूचना का जाल
कार्रवाई का सिलसिला तब शुरू हुआ जब जांगला चौकी के जांच अधिकारी एएसआई दीपक कुमार अपनी टीम के साथ सुबह की नियमित पैट्रोलिंग पर थे। सुबह करीब 7 बजे चिड़गांव बाजार में पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली कि कुछ युवक नशीले पदार्थों के साथ संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त हैं। बिना समय गंवाए पुलिस टीम ने घेराबंदी की और योजनाबद्ध तरीके से चारों आरोपियों—हरि सिंह (35), अर्जुन सिंह (28), धर्मेंद्र सिंह और कांत कुमार को हिरासत में ले लिया। ये सभी आरोपी चिड़गांव तहसील के ही रहने वाले बताए जा रहे हैं।
मौके से बरामद हुआ नशे का सामान
तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2.15 ग्राम चिट्टा बरामद किया। इसके अलावा मौके से फॉइल पेपर, जलते हुए नोट, सीरिंज और लाइटर जैसे उपकरण भी मिले हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि आरोपी न केवल नशे की तस्करी में शामिल थे, बल्कि वे मौके पर इसका सेवन भी कर रहे थे। पुलिस ने सभी के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
जांच के घेरे में ‘खाकी और सरकारी बाबू’
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू हरि सिंह की गिरफ्तारी है, जो जल शक्ति विभाग में कार्यरत है। एक जिम्मेदार सरकारी पद पर रहते हुए इस तरह के अपराध में संलिप्तता ने विभाग की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। डीएसपी रोहड़ू प्रणव चौहान ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस अब इस नेटवर्क की गहराई तक जाने की कोशिश कर रही है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि ये युवक नशा कहां से लाए थे और क्या इनके पीछे कोई बड़ा सप्लायर काम कर रहा है।
By Dhruv Sharma
