हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन, धर्मशाला में सदन की कार्यवाही विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीव्र विरोध के कारण बाधित हुई, जिसके चलते विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।विरोध का मूल कारण और घटनाक्रम:विपक्ष के हंगामे की शुरुआत प्रश्नकाल के दौरान हुई। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने राजस्व मंत्री से जुड़े एक प्रश्न पर, मंत्री के उत्तर (Answer) की बजाय सदन में एक विस्तृत बयान (Statement) देने की मांग रखी। उनका तर्क था कि विषय की गंभीरता को देखते हुए केवल प्रश्न का संक्षिप्त उत्तर पर्याप्त नहीं होगा।विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि प्रश्नकाल का समय प्रश्नों के उत्तर के लिए निर्धारित है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से आग्रह किया कि वे जिस मुद्दे पर मंत्री का बयान चाहते हैं, उसे प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद नियम 67 (काम रोको प्रस्ताव) या अन्य उपयुक्त माध्यमों से उठाएँ। नारेबाजी और सदन का स्थगन:अध्यक्ष के इस निर्णय को विपक्ष ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद, भाजपा सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और वे विरोध जताते हुए सदन के वेल (Well) में आ गए। विधायकों ने वेल में बैठकर धरना देना शुरू कर दिया, जिससे सदन का सामान्य कामकाज पूरी तरह से रुक गया और शोरगुल के कारण कोई भी कार्यवाही संभव नहीं हो पाई।लगभग आधे घंटे तक यह गतिरोध जारी रहा। स्थिति नियंत्रण से बाहर होते देख, अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित करने की घोषणा की। यह घटना राज्य की कांग्रेस सरकार और मुख्य विपक्षी दल भाजपा के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को दर्शाती है।
By Dhruv Sharma
