हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए स्टेट एंट्री टैक्स के विरोध में पंजाब के विभिन्न संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने अहम हाईवे जाम किए और चेतावनी दी है कि यदि टैक्स वापस नहीं लिया गया, तो पंजाब-हिमाचल की सीमाओं को पूरी तरह सील कर दिया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा लागू किए गए स्टेट एंट्री टैक्स के खिलाफ पंजाब में विरोध की लहर तेज होती जा रही है। रविवार को पंजाब मोर्चा, किरती किसान मोर्चा और बीकेयू समेत कई संगठनों ने एकजुट होकर भरतगढ़-नालागढ़ को जोड़ने वाले दो मुख्य स्टेट हाईवेज—पंजैहरा और दभोटा रोड—पर करीब ढाई घंटे तक चक्का जाम किया। मूसलाधार बारिश के बीच भी प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे रहे और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू व पंचायत मंत्री अनिरुद्ध सिंह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि यह टैक्स जनता पर अतिरिक्त बोझ है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
आंदोलनकारी नेताओं ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि अब समझौते का समय निकल चुका है। उन्होंने ऐलान किया है कि 31 मार्च की आधी रात के बाद पंजाब और हिमाचल को जोड़ने वाले सभी 33 एंट्री प्वाइंट्स को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा। इसमें कीरतपुर साहिब-मनाली नेशनल हाईवे और रोपड़ जिले के 11 प्रमुख मार्ग भी शामिल हैं। इसके साथ ही पठानकोट टैक्सी यूनियन ने भी समर्थन देते हुए 1 अप्रैल से पठानकोट-डल्हौजी और चम्बा-धर्मशाला रूट को पूरी तरह ब्लॉक करने की घोषणा की है।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की ओर से तहसीलदार और थाना प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मांग पत्र लिया और उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। हालांकि, ढाई घंटे के जाम के बाद रास्ता तो खोल दिया गया, लेकिन यातायात व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य होने में करीब 4 घंटे का समय लगा। अब सभी की नजरें 31 मार्च की समयसीमा पर टिकी हैं, क्योंकि यदि सरकार ने टैक्स के फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो दोनों राज्यों के बीच संपर्क पूरी तरह कट सकता है।
By Vijay Singh
