हिमाचल प्रदेश में ज़मीनी स्तर पर स्वास्थ्य और पोषण की कमान संभालने वाली हज़ारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर आज आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं। मानदेय में लगातार हो रही देरी ने उनके घर का बजट बिगाड़ दिया है।
हिमाचल प्रदेश की करीब 36,000 आंगनबाड़ी वर्कर्ज और हेल्पर्ज पिछले दो महीनों से मानदेय न मिलने के कारण गहरे आर्थिक संकट में हैं। प्रदेश की इन महिलाओं का कहना है कि वे गांव-गांव जाकर बच्चों के पोषण, टीकाकरण और महिला कल्याण योजनाओं को लागू करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करती हैं, यहाँ तक कि अब वे सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों की वेरिफिकेशन का अतिरिक्त काम भी संभाल रही हैं। इसके बावजूद, पिछले महीने उन्हें केवल केंद्र का हिस्सा मिला और इस महीने केंद्र व राज्य दोनों ओर से भुगतान शून्य रहा। घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक ज़रूरतों को पूरा करना अब उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
आंगनबाड़ी यूनियन (सीटू) की अध्यक्ष नीलम जसवाल ने सरकार से इस लंबित राशि को तुरंत जारी करने की पुरज़ोर मांग की है। वर्तमान में कार्यकर्ताओं को 10,000 रुपये और हेल्पर्ज को 5,800 रुपये मासिक मानदेय मिलता है। राहत की बात यह है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक डॉ. पंकज ललित ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों (DPO) को बिल क्लियर करने के निर्देश दे दिए हैं। विभाग का दावा है कि जल्द ही दोनों महीनों का बकाया मानदेय कर्मचारियों के खातों में डाल दिया जाएगा।
By Dhruv Sharma
