कांगड़ा: धर्मशाला में चल रहे हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पंचायत चुनावों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार तकरार देखने को मिली। दो दिनों तक चली चर्चा के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में स्पष्ट किया कि अब स्टेट इलेक्शन कमीशन पर भी डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू होगा। जब तक यह अधिनियम प्रभावी रहेगा, तब तक पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराना संभव नहीं है।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय प्रदेश में पुनर्गठन और वार्डबंदी का काम जारी है। कई पंचायतें अत्यधिक विस्तार वाली हैं, इसलिए नई पंचायतों के गठन की प्रक्रिया भी चल रही है। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया जून में भी शुरू की गई थी, लेकिन 2023 की तुलना में इस बार आई गंभीर प्राकृतिक आपदा के कारण चुनाव को आगे बढ़ाना पड़ा। उन्होंने कहा कि पंचायतों का कार्यकाल अभी बाकी है और यदि डिजास्टर एक्ट हट जाता है, तो जनवरी तक चुनाव हो सकते हैं।मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया। इससे पहले भी सदन में प्रश्नकाल को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ा और हंगामे के चलते कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के बीच भी तीखी बहस हुई। नेगी के कुछ शब्दों पर विपक्ष ने आपत्ति जताई और स्पीकर से उन शब्दों को कार्यवाही से हटाने की मांग की। जयराम ठाकुर का कहना था कि मंत्री मुद्दे से भटककर व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं, जबकि नेगी का आरोप था कि विपक्ष तथ्य छिपाने की कोशिश कर रहा है।सत्र की शुरुआत से पहले भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार पर विकास निधि रोकने और भुगतान में देरी के आरोप लगाए तथा ट्रेजरी भुगतान बहाल करने और ऐच्छिक विकास निधि जारी करने की मांग की। वहीं OPS पर अपने पुराने बयान को लेकर जयराम ठाकुर ने साफ किया कि उन्होंने किसी योजना को बंद करने की बात नहीं कही और प्रतिशोध की भावना से काम नहीं किया जाएगा।
By Dhruv Sharma
